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सुको के आदेश के बाद महाराष्ट्र में हाइवे के किनारे अब नहीं खुलेंगे ढाबे, क्यों किसलिए लगी रोक

📰 Palpal India 🕐 1 min read 📅 August 11, 2026 👁 7 views
सुको के आदेश के बाद महाराष्ट्र में हाइवे के किनारे अब नहीं खुलेंगे ढाबे, क्यों किसलिए लगी रोक
मुंबई. राजस्थान के फलोदी में 2025 में हुए सड़क हादसे के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे (आरओडबलू) के भीतर किसी भी नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण अथवा संचालन पर रोक लगा दी. जिला कलेक्टरों को 60 दिनों के भीतर सभी नए और मौजूदा अनधिकृत ढांचों को हटाने या ध्वस्त करने के निर्देश दिया गया है. सरकार के सरकारी संकल्प के मुताबिक, कोई भी विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय हाईवे के सुरक्षा क्षेत्र में आने वाली जगहों के लिए एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की पूर्व मंजूरी के बिना कोई लाइसेंस, एनओसी या व्यापारिक अनुमति जारी या उसका नवीनीकरण नहीं कर सकेगा. ऐसी जगहों पर पहले से जारी लाइसेंस की 30 दिनों के भीतर समीक्षा करनी होगी. कौन-कौन से राष्ट्रीय राजमार्गों पर हैं ढाबे? अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़ी संख्या में ट्रक स्टॉप और बड़े पारिवारिक ढाबे हैं. इनमें खास तौर पर मुंबई-नासिक, मुंबई-अहमदाबाद और पुराने मुंबई-पुणे मार्ग शामिल हैं. अधिकारी अब यह जांच करेंगे कि इनमें से कौन-कौन से प्रतिष्ठान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आने वाले आरओडबलू के भीतर स्थित हैं. अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई उसकी वास्तविक स्थिति, मंजूरियों, हाइवे सुरक्षा मानकों और अन्य जरूरी अनुमतियों के आधार पर की जाएगी. सरकारी संकल्प में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि अतिक्रमण हटाने की समयबद्ध कार्रवाई की संयुक्त जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और पुलिस आयुक्त/पुलिस अधीक्षक की होगी. राज्य सरकार जारी करेगी ऐसेनोटिफिकेशन राज्य सरकार 60 दिनों के भीतर ऐसे नोटिफिकेशन भी जारी करेगी, जिनके तहत किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य बिंदु से 40 मीटर के दायरे में आवासीय और 75 मीटर के दायरे में व्यावसायिक भूमि उपयोग में बदलाव पर रोक होगी. हर उस जिले में, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, कलेक्टर को सात दिनों के भीतर जिला हाइवे सुरक्षा टास्क फोर्स का गठन करना होगा. इसमें जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई या संबंधित भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे.
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