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यूपी विधानसभा प्रमुख सचिव की नियुक्ति:चुनौती देने वाली याचिका पर कल इलाहाबाद हाइकोर्ट कि लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की नियुक्ति और उनके पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। यह याचिका विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी कर्मेश प्रताप सिंह ने दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति ए के चौधरी की खंडपीठ सुनवाई करेगी। प्रदीप कुमार दुबे को इस मामले में प्रतिवादी बनाया गया है। इससे पहले इस मामले में 5 जून को सुनवाई हुई थी, तब न्यायालय ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को अगली सुनवाई से पहले अपना संक्षिप्त या विस्तृत जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद यह याचिका कई बार न्यायालय में लगी, लेकिन समयाभाव के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। 5 जून की सुनवाई के दौरान विधानसभा सचिवालय और अध्यक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता अभिनव त्रिवेदी ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति उठाई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि दुबे उस प्रकार के सार्वजनिक पद पर नहीं हैं, जिस पर क्वो वारंटो रिट जारी की जा सके, और वे संप्रभु कार्यों का निर्वहन भी नहीं करते। उन्होंने संक्षिप्त जवाबी शपथपत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा था। याचिका के माध्यम से न्यायालय को बताया गया है कि 2009 में दुबे की नियुक्ति और उसके बाद उनका पद पर बने रहना वैधानिक नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि विधानसभा सचिवालय (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 1974 के अनुसार, संबंधित पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 52 वर्ष निर्धारित थी। याचिका में यह भी बताया गया है कि प्रदीप कुमार दुबे उस समय पहले ही इस आयु सीमा को पार कर चुके थे। उन्होंने 13 जनवरी 2009 को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी और उसी दिन उन्हें संसदीय कार्य विभाग में प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया था। इसके छह दिन बाद उन्हें विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था।
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