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यूपी में बिजली चोरी वाले 50 फीडर रडार पर:5 डिस्कॉम के टॉप-10 की होगी रोज निगरानी
सीएम योगी आदित्यनाथ की फटकार के बाद यूपीपीसीएल ने प्रदेश के पांचों वितरण निगमों में सबसे ज्यादा राजस्व हानि वाले 50 फीडर चिन्हित किए हैं। हर डिस्कॉम के टॉप-10 फीडरों की नियमित समीक्षा होगी। यहां मीटरिंग से लेकर बिलिंग, बकाया वसूली और बिजली चोरी तक हर स्तर पर डेटा खंगाला जाएगा। अब फीडर से ऊपर तक तय होगी जवाबदेही यूपीपीसीएल अब इन 50 फीडरों की निगरानी सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं करेगा। फीडर स्तर से लेकर वितरण खंड और उच्च अधिकारियों तक इसकी समीक्षा होगी। राजस्व हानि के आंकड़ों की नियमित समीक्षा के साथ संबंधित अधिकारियों से सुधार का हिसाब भी लिया जाएगा। क्लस्टर अभियान से मिले नतीजों के बाद अब कॉरपोरेशन ने साफ कर दिया है कि जहां बिजली की खपत ज्यादा है लेकिन राजस्व कम मिल रहा है, वहां समस्या को डेटा से पकड़ा जाएगा और उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। टॉप-50 फीडरों में क्या-क्या जांचेंगे? यूपीपीसीएल ने प्रत्येक वितरण निगम के 10 सबसे ज्यादा राजस्व हानि वाले फीडर चुने हैं। इस तरह कुल 50 फीडरों की लगातार निगरानी होगी। इन फीडरों पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने जांच के बिंदु भी तय किए गए हैं। कुछ फीडरों पर 68% तक घटा राजस्व नुकसान इस डेटा आधारित निगरानी का असर शुरुआती आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। जुलाई 2026 तक पांचों वितरण निगमों के चयनित फीडरों में राजस्व हानि में बड़ी कमी दर्ज की गई। मध्यांचल में सबसे बड़ा सुधार : मध्यांचल के शाहाबाद, गोंडा, सुलतानपुर, आंवला और बहेड़ी जैसे चयनित फीडरों में राजस्व हानि ₹47.73 करोड़ से घटकर ₹15.30 करोड़ रह गई। यानी करीब ₹32.43 करोड़ की कमी, जो 68% है। केस्को में 58% की कमी : कानपुर के दादानगर, आलूमंडी, रतनपुर और कल्याणपुर जैसे फीडरों में राजस्व हानि ₹10.60 करोड़ से घटकर ₹4.46 करोड़ रह गई। करीब ₹6.14 करोड़ यानी 58% की कमी दर्ज हुई। पश्चिमांचल में 29% कमी : देवबंद, ज्योतिबा नगर, खुर्जा और ग्रेटर नोएडा के चयनित फीडरों में राजस्व हानि ₹28.14 करोड़ से घटकर ₹19.96 करोड़ रह गई। यानी ₹8.18 करोड़ और करीब 29% की कमी। पूर्वांचल में 22% और दक्षिणांचल में 21% कमी : पूर्वांचल के बैरिया, गोपीगंज, प्रयागराज, बलिया और फूलपुर क्षेत्र में राजस्व हानि ₹44.24 करोड़ से घटकर ₹34.41 करोड़ हुई। करीब ₹9.83 करोड़ यानी 22% की कमी दर्ज की गई। दक्षिणांचल के राठ, चित्रकूट, कोसी, अतर्रा, दिबियापुर और ललितपुर जैसे फीडरों में राजस्व हानि ₹22.53 करोड़ से घटकर ₹17.89 करोड़ रह गई। यहां करीब ₹4.64 करोड़ यानी 21% की कमी आई। पहले 699 क्लस्टर और 372 फीडरों पर चला चुके हैं अभियान यूपीपीसीएल ने पहले क्लस्टर आधारित अभियान चलाया था। प्रदेश के पांचों वितरण निगमों में 699 क्लस्टर और 372 फीडर चिन्हित किए गए। इनमें करीब 42.21 लाख उपभोक्ता शामिल थे। इन उपभोक्ताओं की बिजली खपत का मूल्य करीब ₹1,637 करोड़ था। अभियान में लंबे समय से बिल नहीं चुकाने वाले और बड़े बकायेदारों पर विशेष फोकस किया गया। इसका असर राजस्व संग्रह पर दिखा। करीब ₹614.86 करोड़ की वसूली हुई, जबकि 77,050 नए बिजली कनेक्शन भी जारी किए गए।
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