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Xप्लेन: पेट्रोल की 'सल्तनत' खत्म! CNG, EV और हाइब्रिड व्हीकल्स बिजनेस कैसे रचा इतिहास?

📰 Abp News 🕐 1 min read 📅 September 7, 2026 👁 1 views
Xप्लेन: पेट्रोल की 'सल्तनत' खत्म! CNG, EV और हाइब्रिड व्हीकल्स बिजनेस कैसे रचा इतिहास?

साल था 2025... पेट्रोल वाहनों की बढ़त अल्टरनेटिव फ्यूल यानी वैकल्पिक ईंधन पर करीब 11 फीसदी थी. बस एक साल बाद अगस्त 2026 में यह बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई. भारत में ऑटोमोबाइल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियां पेट्रोल से आगे निकल गया. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 ने भारतीय ऑटो रिटेल के लिए इतिहास का सबसे बड़ा अगस्त बनाया. पूरे सेक्टर की बिक्री 24.23 लाख यूनिट रही, जो पिछले साल के मुकाबले 17.51% ज्यादा है. आखिर इतना बदलाव क्यों हुआ और आगे क्या होने वाला है...

ऑल्टरनेटिव फ्यूल vs पेट्रोल में क्या बदला?


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यानी ऑल्टरनेटिव फ्यूल वाहनों का हिस्सा 41.95% हो गया, जबकि पेट्रोल 40.85% पर आ गया. पेट्रोल अब भी सबसे बड़ा अकेला ईंधन है, लेकिन पहली बार तीनों ऑल्टरनेटिव फ्यूल मिलकर उससे आगे निकल गए.

FADA के प्रेसिडेंट साई गिरिधर ने कहा, 'महीने की सबसे बड़ी बात एक संरचनात्मक बदलाव थी. भारत के इतिहास में पहली बार ऑल्टरनेटिव फ्यूल ने पैसेंजर व्हीकल मार्केट में पेट्रोल को पीछे छोड़ दिया.'

पूरे सेक्टर का हाल क्या रहा?


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पैसेंजर व्हीकल ने पहली बार अगस्त में 4 लाख का आंकड़ा पार किया. टू-व्हीलर ने 2018 के बाद पहली बार अगस्त का अपना सबसे बड़ा रिकॉर्ड तोड़ा. हालांकि, जुलाई 2026 के मुकाबले बिक्री 6.48% घटी, क्योंकि मानसून का सीजन था. गणेश चतुर्थी और ओणम की खरीदारी भी सितंबर में शिफ्ट हो गई.

गांव ने शहर को कैसे पीछे छोड़ा?

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि रूरल (ग्रामीण) मार्केट ने हर सेगमेंट में अर्बन (शहरी) मार्केट को पछाड़ दिया.


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EV और ऑल्टरनेटिव फ्यूल में किसका कितना दबदबा?

इस मामले में EV ने बाजी मार ली:

  • टू-व्हीलर: अगस्त 2026 में टू-व्हीलर EV पेनिट्रेशन 10.68% हो गया. यह 2025 में 7.66% था. यह किसी गैर-त्योहारी महीने में पहली बार 10% का आंकड़ा पार हुआ.
  • थ्री-व्हीलर: यह सेगमेंट अब बुनियादी तौर पर इलेक्ट्रिक हो चुका है. EV पेनिट्रेशन 65.30% है.
  • कमर्शियल व्हीकल: कमर्शियल व्हीकल में EV का हिस्सा 5.18% हो गया, जो 2025 में 2.06% था. E-CV वॉल्यूम ने नया मासिक रिकॉर्ड बनाया.
  • पैसेंजर व्हीकल: PV सेगमेंट में CNG का हिस्सा 25.28% हो गया, जो एक साल पहले 21% था. हाइब्रिड 9.04% और EV 7.63% पर रहे.

इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री सालाना आधार पर 52% बढ़ी यानी कुल 30,700 यूनिट.

इन बड़े बदलावों की वजहें क्या हैं?

यह बदलाव 5 बड़ी वजहों से आए हैं:

1. गाड़ी चलाने का खर्च

सबसे अहम वजह यह है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के चलते उपभोक्ता अब वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं. लंबे समय में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना पेट्रोल से सस्ता पड़ता है. डीलर्स भी इस बदलाव का क्रेडिट 'रनिंग-कॉस्ट इकोनॉमिक्स' को ही दे रहे हैं. यानी आम आदमी अपनी जेब पर पड़ने वाले खर्च को देखते हुए सस्ते विकल्प तलाश रहा है.

2. E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं की हिचकिचाहट

सरकार E20 पेट्रोल (पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाना) की तरफ बढ़ रही है. इस नए ईंधन को लेकर उपभोक्ताओं के मन में तरह-तरह की हिचकिचाहट है, जैसे कि इससे इंजन पर क्या असर पड़ेगा, माइलेज क्या होगा और सर्विसिंग महंगी होगी आदि.

इसी उठा-पटक और झिझक की वजह से बहुत से पेट्रोल खरीदार अब सीधे CNG, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने लगे हैं.

3. GST दरों में कटौती से गाड़ियां सस्ती हुईं

सरकार ने सितंबर 2025 में वाहनों पर GST दरों में कटौती की थी. इसका सीधा फायदा हुआ कि कंपनियों ने अपनी कीमतें घटा दीं. इससे पेट्रोल, डीजल, CNG, हाइब्रिड और EV जैसी सभी गाड़ियां ज्यादा किफायती हो गईं. इसने खरीदारों को नए विकल्प आजमाने के लिए भी आगे बढ़ाया.

4. ग्रामीण बाजार की तेज रफ्तार

ग्रामीण बाजार ने इस बदलाव में सबसे अहम भूमिका निभाई है. अगस्त 2026 में:

  • ग्रामीण इलाकों में ऑटो रिटेल की बढ़ोतरी 19.79% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 15.17% रही.
  • पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में तो ग्रामीण बिक्री 24.99% बढ़ी, जो शहरी बिक्री (10.93%) से दोगुनी से भी ज्यादा थी.

FADA के अध्यक्ष साई गिरिधर के मुताबिक, 'ग्रामीण मांग अब मानसून से अलग होने लगी है. कृषि से जुड़ा सेगमेंट थोड़ा नरम रहा, लेकिन गैर-कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेज रही.' गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और लोग नए, किफायती वाहन खरीद रहे हैं.

5. त्योहारी सीजन की शुरुआत

अगस्त 2026 में ओणम और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों ने भी बिक्री को बढ़ावा दिया. हालांकि, गणेश चतुर्थी और ओणम से जुड़ी कुछ खरीदारी सितंबर में शिफ्ट हो गई. इससे अगस्त की महीने-दर-महीने बिक्री में थोड़ी गिरावट आई.

इसके अलावा अब बाजार में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के मॉडल्स की संख्या और विकल्प काफी बढ़ गए हैं. पहले जहां लोगों के पास सीमित विकल्प होते थे, वहीं अब हर बजट और जरूरत के लिए वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ी मौजूद है. इससे ग्राहकों के लिए पेट्रोल छोड़कर दूसरे ईंधन पर स्विच करना आसान हो गया है.

तो क्या अब नए विकल्पों के आगे चुनौतियां भी हैं?

FADA के मुताबिक, इस सफर में 5 बड़ी चुनौतियां हैं:

1. डीलर्स पर बढ़ता इन्वेंटरी का बोझ

  • हाई स्टॉक लेवल: अगस्त 2026 में पैसेंजर व्हीकल की इन्वेंटरी 38 से 40 दिनों तक पहुंच गई है.
  • डीलर्स की चिंता: FADA ने खुद इस बात पर असहजता जताई है कि इतनी ज्यादा इन्वेंटरी डीलर्स पर वित्तीय दबाव डाल सकती है. अगर मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, तो डीलर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

2. बढ़ती लागत और कीमतों का दबाव

  • लगातार कीमत में बढ़ोतरी: बढ़ती कच्चे माल की कीमतों, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से कार बनाने वाली कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं. मारुति सुजुकी ने सितंबर 2026 में चौथी बार कीमतें बढ़ाई हैं, तो वहीं टाटा मोटर्स ने 25,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की है.
  • मांग पर असर: इन बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी की क्षमता पर पड़ सकता है. हुंडई इंडिया का अनुमान है कि बढ़ती लागत की वजह से वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में ऑटो इंडस्ट्री की विकास दर 5-6% तक सिमट सकती है.

3. इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौती

वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियां (खासकर EV) की बढ़ती मांग के साथ, उनके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा एक बड़ी अड़चन है.

  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: EV खरीदने की रफ्तार के मुकाबले चार्जिंग स्टेशनों की संख्या काफी कम है. हेवी व्हीकल्स (ई-ट्रक) के लिए स्थिति और भी गंभीर है. देश में 240 किलोवाट से ज्यादा क्षमता वाले सिर्फ 9 सुपर-फास्ट चार्जर ही उपलब्ध हैं.
  • ग्राहकों की शिकायतें: ग्राहक लगातार चार्जिंग से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. कई बार चार्जिंग प्वाइंट तो मौजूद होते हैं, लेकिन वे काम नहीं करते.

4. सरकारी नीतियों और नियमों का दबाव

  • सख्त नियमों का खतरा: सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर उद्योग ने खुद से बदलाव की रफ्तार नहीं बढ़ाई, तो सख्त नियम और मजबूत जनादेश लागू किए जा सकते हैं.
  • मौजूदा नियमों का पालन: उद्योग को पहले से ही CAFE (कार्बन उत्सर्जन) मानदंडों, E20 इथेनॉल मिश्रण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नियमों का पालन करने में कठिनाई हो रही है.
  • स्थानीय प्रतिबंध: दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में पहले से ही आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों पर सख्त पाबंदियां लागू हैं.

5. आर्थिक और वैश्विक कशमकश

  • महंगाई और ब्याज दरें: लगातार बनी हुई महंगाई और ऊंची ब्याज दरें वाहन खरीदने के लिए लोन को महंगा बना रही हैं, जिससे आम आदमी की खरीदारी की क्षमता प्रभावित हो रही है.
  • भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसे वैश्विक तनाव सप्लाई चेन को तोड़ सकते हैं और महंगाई को और बढ़ा सकते हैं.
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