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वकीलों के मुंशियों के लिए कल्याण कोष बने:लखनऊ हाईकोर्ट ने सरकार को नई कमेटी बनाने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अधिवक्ताओं के मुंशियों के कल्याण का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को अधिवक्ता लिपिकों (मुंशी) की समस्याओं पर विचार के लिए चार सप्ताह के भीतर एक नई कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने वर्ष 2017 में सुशील कुमार श्रीवास्तव द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने जनवरी 2021 में गठित पुरानी कमेटी की सिफारिशों को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि पुरानी कमेटी के अधिकांश सदस्यों को अधिवक्ता लिपिकों के काम और न्यायिक व्यवस्था में उनकी भूमिका की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। याचिका में बताया गया था कि मुंशी मुकदमों की फाइलिंग, कोर्ट रजिस्ट्री से समन्वय, प्रमाणित प्रतियां लेने और याचिकाओं की कमियां दूर कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इन महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद, उन्हें चिकित्सा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलतीं। न्यायालय ने राज्य सरकार के इस तर्क को भी अस्वीकार कर दिया कि कल्याणकारी योजना से वित्तीय बोझ बढ़ेगा। न्यायालय ने सुझाव दिया कि वकालतनामा पर लगने वाले टिकट या स्टांप से निर्धारित राशि कल्याण कोष में जमा की जा सकती है, जिसका उपयोग मुंशियों के हित में किया जाएगा। नई कमेटी में महाधिवक्ता या उनके नामित अनुभवी अपर महाधिवक्ता, इलाहाबाद और लखनऊ पीठ से एक-एक वरिष्ठ अधिवक्ता, तथा बार काउंसिल के चेयरमैन द्वारा नामित सदस्य शामिल होंगे।
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