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दुष्कर्म के दो दोषियों को 20-20 साल की सजा:बलरामपुर कोर्ट ने तीसरे आरोपी को भी एक वर्ष का कारावास सुनाया
बलरामपुर में दुष्कर्म के एक मामले में न्यायालय ने दो दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते 'ऑपरेशन कनविक्शन' के तहत यह फैसला आया है। मामले में सहयोगी रहे तीसरे दोषी को भी एक वर्ष के कारावास से दंडित किया गया है। न्यायालय ने दोनों मुख्य दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला थाना कोतवाली देहात क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, 5 जून 2017 को पीड़िता के परिजनों ने थाने में तहरीर दी थी। इसमें घनश्याम (पुत्र दुलारे यादव, निवासी सेमरहना), गोली उर्फ उमेश यादव (पुत्र लक्ष्मण यादव, निवासी मझतराई) और लहरी उर्फ बोस कुमार यादव (पुत्र पारसनाथ यादव) पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली देहात में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना निरीक्षक नरेंद्र बहादुर यादव ने की। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस ने लगातार प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपों के आधार पर तीनों दोषियों को सजा सुनाई। कोर्ट ने सुनाया फैसला अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, बलरामपुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया। घनश्याम को भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और ₹6,000 का अर्थदंड दिया गया। गोली उर्फ उमेश यादव को भी इसी धारा के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और ₹5,000 का अर्थदंड सुनाया गया। लहरी उर्फ बोस कुमार यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 342 के तहत एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। एसपी विकास कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे 'दोषसिद्धि अभियान' के तहत इस मामले की लगातार निगरानी की गई। पुलिस की ओर से लगातार पैरवी और साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी का नतीजा रहा कि करीब नौ वर्ष पुराने इस मामले में दोषियों को कठोर सजा मिल सकी। पुलिस अधिकारियों ने इस फैसले को 'ऑपरेशन कनविक्शन' के तहत न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
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