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बीजेपी-कांग्रेस के दिग्गज अपना वार्ड नहीं जिता पाए:विधायक प्रियंका-मेवाराम के वार्ड में हारी पार्टियां, पूर्व सभापति भी हारे
बाड़मेर नगर निकाय चुनाव के रिजल्ट बड़े ही दिलचस्प आए हैं। बीजेपी-कांग्रेस कई दिग्गज अपने वार्ड तक भी जीता नहीं पाए। इसमें बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी अपने खुद के वार्ड को जीता नहीं पाई। इसके अलावा विधायक के प्रभाव वाले वार्ड 21, 23, 25 वार्ड में बीजेपी हार गई। इधर पूर्व विधायक मेवाराम जैन खुद के वार्ड संख्या 54, 2 में कांग्रेस को जीता नहीं पाए। पूर्व सभापति लूणकरण बोथरा का वार्ड 5 भी बीजेपी हार गई। दरअसल, नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस की सबसे बुरी स्थिति चौहटन नगर पालिका में रही। 20 वार्डों में कांग्रेस एक भी सीट जीत नहीं पाई। वहीं 20 वार्डों में कांग्रेस को सिर्फ 183 वोट ही मिले। बीजेपी को 4166 और निर्दलीय को 3813 वोट मिले। लेकिन चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल खुद के वार्ड 13 में बीजेपी को जीता नहीं पाए। यहां से निर्दलीय मनीषा जीत गई। आपको बता दें कि बाड़मेर नगर परिषद में 179 और चौहटन नगर पालिका में 64 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। वार्ड 21 में निर्दलीयों के बीच टक्कर वार्ड संख्या 21 में कांग्रेस और बीजेपी तीसरे और चौथे नंबर पर रही। यहां पर निर्दलीय पोकर सिंह और दलाराम के बीच मुकाबला हुआ। पोकर सिंह ने 158 वोटों से हराया। वहीं, वार्ड संख्या 26 में बीजेपी के बागी महेश सोनी ने 32 वोट से कांग्रेस के मुकेश जैन को हराया। वार्ड संख्या 54 से जीतने वाली सायर कंवर ने भाजपा की निर्मला को 220 भी वोट से हराया। नगर निकाय चुनाव कमेटी के चेयरमैन का वार्ड हारे कांग्रेस ने बाड़मेर नगर निकाय चुनाव कमेटी के चेयरमैन मांगीलाल वडेरा को बनाया था। लेकिन वडेरा खुद का वार्ड 15 भी कांग्रेस के खाते में डाल नहीं पाए। पहली बार कमेटी के चेयरमैन बनाया गया लेकिन कांग्रेस को बहुमत नहीं दिला पाए। 15 साल बाद नगर परिषद में कांग्रेस हार गई है। विधायक खुद के वार्ड के साथ अपने प्रभाव वाले वार्ड हारे बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी निर्दलीय विधायक है। लेकिन सरकार बनने के साथ बीजेपी को समर्थन दिया हुआ है। वहीं नगर निकाय चुनाव में भी बीजेपी की मीटिंग करने के साथ बीजेपी को जिताने में लगे हुए थे। लेकिन प्रियंका चौधरी अपने खुद का वार्ड संख्या 16 में बीजेपी प्रत्याशी को जीता नहीं पाई। कांग्रेस से 199 वोटों से हार गए। वहीं खुद के प्रभाव वाले वार्ड संख्या 21, 23 और 25 में भी परिणाम सकारात्मक नहीं रहें है। कई कांग्रेस-बीजेपी के पदाधिकारी का वार्ड हारे कांग्रेस पीसीसी मेंबर और चुनाव कमेटी के सदस्य रिड़मलसिंह दांता खुद के गृह वार्ड संख्या 1 में कांग्रेस को जीता नहीं पाए। यहां पर निर्दलीय सुरतान सिंह जीते है। वहीं पीसीसी सदस्य आजादसिंह अपने खुद का वार्ड संख्या 50 में प्रचार-प्रसार करने के बावजूद जीता नहीं पाए। यहां पर बीजेपी से विक्रम दर्जी जीते है। वहीं बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह खारा अपने गृह वार्ड संख्या 24 जीता नहीं पाए। वहां पर कांग्रेस की रूखमो देवी जीती है। बीजेपी दिग्गज नेता दिलीप पालीवाल के गृह वार्ड 48 में बीजेपी हार गई। वहीं कांग्रेस जीती है। पूर्व सभापति हारे कांग्रेस से सभापति रहे दीपक माली वार्ड संख्या 19 में बीजेपी के दमाराम से हार गए। दमाराम माली पांचवी बार पार्षद बने है। रोचक बात यह है कि दीपक माली का खुद का वार्ड है। वहीं दमाराम माली दूसरे वार्ड से यहां पर आकर चुनाव लड़ा और जीत गए। यह जिताने में रहे सफल बीजेपी के जिला महामंत्री महावीर सिंह के वार्ड संख्या 2 में बड़े मार्जिन से बीजेपी को जिताया। वहीं बीजेपी के सीनियर लीडर प्रकाश सर्राफ अपने वार्ड संख्या 8 में बीजेपी को जिताने में सफल रहें। इधर कांग्रेस के पीसीसी सदस्य ठाकराराम माली अपने खुद का वार्ड बचाने में सफल रहे लेकिन कांग्रेस का बोर्ड में नहीं बना पाए। वहीं, वीपी सिंह वार्ड संख्या 35 में दुबारा कांग्रेस जिताने में सफल रहे। पूर्व उप प्रतिपक्ष नेता की पत्नी अर्चना चांडक बड़े अंतर से जीत गई है। 9 वार्डों में नजदीकी टक्कर बाड़मेर नगर परिषद के 55 वार्डों में से 9 वार्डों में नजदीकी टक्कर रही है। सबसे कम मार्जिन वाली सीट वार्ड संख्या 28 रही है। बीजेपी के राणुलाल ने कांग्रेस के विक्रम कुमार को मात्र 3 वोट से हराया। वहीं, वार्ड संख्या 8 में कांग्रेस और बीजेपी में सीधी टक्कर में बीजेपी के किशन बोहरा ने बाजी मारी। वहीं, वार्ड संख्या 10 और 36 में मार्जिन मात्र 6 वोट का ही रहा है। 5 वार्डों में बड़ी जीत बाड़मेर नगर परिषद के 55 वार्डों में 5 वार्ड ऐसे है जहां एक तरफ जीत रही है। सबसे बड़ी जीत वार्ड 55 में भीम सिंह की 1265 वोट की रही है। वहीं बीजेपी के प्रकाश सिंह ने डॉक्टर रोहित को 767 वोट से हराया है। पूर्व प्रतिपक्ष नेता पृथ्वीराज चांडक की पत्नी अर्चना 567 वोट से जीती। लगातार दूसरी बार जीतने वाले सुनील कुमार सिंघवी 455 वोट और पहली बार चुनाव लड़ने वाले किशनदान 538 वोट से जीते।
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