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तप आत्मशुद्धि का माध्यम, सच्ची श्रद्धा के बिना तप निरर्थक
कोटा के रिद्धि-सिद्धि नगर में मुनि श्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज ने तप के बाह्य और आंतरिक स्वरूप बताते हुए सच्ची श्रद्धा का महत्व समझाया।
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