politics
स्वतन्त्रता का दिवस सुहाना, विकृतियों से मुक्त बने भारत
पन्द्रह अगस्त केवल ध्वजारोहण करने, राष्ट्रगान गाने और स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करने का दिन नहीं है। यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि जिस स्वतंत्रता के लिए असंख्य देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उस स्वतंत्रता को हमने कितना सार्थक बनाया है और विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें अभी कितना आगे जाना है। वर्ष 1947 में देश राजनीतिक पराधीनता से मुक्त हुआ था, लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब भारत सामाजिक विकृतियों, आर्थिक विषमता, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, जातिवाद, संकीर्णता, बेरोजगारी, हिंसा और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से भी मुक्त हो। गुलामी की पीड़ा को वही ...
Read full article on Swatantra Prabhat