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शामली में बीमा कंपनी पर 3.64 लाख का जुर्माना:क्लेम निरस्त करने पर उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
शामली में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम निरस्त करने के मामले में नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है। आयोग ने कंपनी को परिवादी को कुल 3,64,195 रुपये की देनदारी अदा करने का आदेश दिया है। इसमें 3,09,195 रुपये का बीमा क्लेम, 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति, पांच हजार रुपये परिवाद व्यय और 25 हजार रुपए अर्थदंड शामिल है। मामला ऊन क्षेत्र के गांव गागोर निवासी रविंद्र कुमार से जुड़ा है। उन्होंने 5 फरवरी 2024 को नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और पॉलिसी बाजार इंश्योरेंस ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया था। पत्नी के इलाज में आया 3.44 लाख का खर्च रविंद्र कुमार के मुताबिक, उन्होंने 19 अप्रैल 2018 को ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से हैप्पी फ्लोटर फैमिली पॉलिसी ली थी। इसमें उनकी पत्नी अर्चना और बेटे दीपांशु चौधरी भी शामिल थे। पॉलिसी का सम एश्योर्ड दो लाख रुपये था और इसकी वैधता 18 अप्रैल 2024 तक थी। आरोप है कि पॉलिसी बाजार के एजेंट अक्षय ने कई फायदे बताए और पॉलिसी को नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में पोर्ट करा दिया। बाद में पत्नी की तबीयत खराब होने पर उन्हें गुरुग्राम स्थित बीमा कंपनी के अधिकृत अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज और ऑपरेशन का कुल खर्च 3,44,706 रुपये आया। अस्पताल की ओर से कैशलेस इलाज के लिए बीमा कंपनी को अनुरोध भेजा गया था। रविंद्र कुमार के अनुसार, अस्पताल कर्मचारियों ने उन्हें कैशलेस सुविधा स्वीकृत होने की जानकारी दी और कहा कि ऑपरेशन के लिए उन्हें कोई रकम जमा नहीं करनी होगी। हालांकि ऑपरेशन के बाद डिस्चार्ज के समय अस्पताल ने बताया कि बीमा कंपनी ने कैशलेस सुविधा स्वीकृत नहीं की है। इसके बाद रविंद्र कुमार ने 3,39,414 रुपये का अस्पताल बिल स्वयं जमा कर पत्नी को डिस्चार्ज कराया। क्लेम किया तो कंपनी ने कर दिया निरस्त इलाज में खर्च हुई रकम की भरपाई के लिए रविंद्र कुमार ने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने इसे निरस्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने बीमा कंपनी को 3,09,195 रुपए की क्लेम राशि देने का आदेश दिया। इस रकम पर क्लेम निरस्त किए जाने की तिथि से अंतिम भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा आयोग ने परिवादी को मानसिक परेशानी और अन्य क्षति के लिए 25 हजार रुपए क्षतिपूर्ति तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 5 हजार रुपए देने का आदेश दिया। आयोग ने बीमा कंपनी की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह राशि राजकोष में जमा कराई जाएगी। इस तरह कंपनी पर कुल देनदारी 3,64,195 रुपये, ब्याज को छोड़कर, निर्धारित की गई है।
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