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संसद के मानसून सत्र का हंगामेदार अंत, ओम बिरला की चाय पर विपक्ष का boycott लेकिन CP राधाकृष्णन के साथ पी चाय
संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही समाप्त हो गया, लेकिन सत्र के अंतिम दिन राजनीतिक गलियारों में एक दिलचस्प और अनोखा नजारा देखने को मिला। संसद के दोनों सदनों के दो अलग-अलग सभापतियों द्वारा बुलाई गई पारंपरिक चाय पार्टियों को लेकर विपक्ष का रवैया बेहद चौकाने वाला और दोहरा रहा। एक तरफ जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से आयोजित चाय पार्टी का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस सहित 'इंडिया' गठबंधन के तमाम प्रमुख घटक दलों ने पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया, वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा रखी गई चाय पार्टी में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए और सौहार्दपूर्ण माहौल में नजर आए। हंगामे की भेंट चढ़ा लोकसभा और राज्यसभा का मानसून सत्र इस बार का मानसून सत्र शुरुआत से लेकर अंत तक भारी हंगामे और राजनीतिक टकराव की वजह से सुर्खियों में रहा। नीट पेपर लीक मामले, छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर लगातार जोरदार हंगामा किया, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही का बहुमूल्य समय बर्बाद हुआ। गुरुवार को सत्र के अंतिम दिन जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इसी तरह राज्यसभा में भी भारी शोर-शराबे और गहमागहमी के बीच खान एवं खनिज विकास संशोधन विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित करा लिया गया और इसके बाद उच्च सदन की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए समाप्त कर दी गई। सभापति ने जताई चिंता, समय के सही इस्तेमाल पर जोर राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मानसून सत्र के समापन पर अपने विदाई संबोधन में सदन के भीतर लगातार हुए व्यवधानों और हंगामे पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस सत्र के दौरान सदन के समय का पूरा और सही उपयोग नहीं हो सका है, जो कि लोकतंत्र के लिए एक चिंता का विषय है। हालांकि, भारी हंगामे और बाधाओं के बावजूद इस पूरे सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के करीब 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल हुई। सभापति ने सभी सांसदों को नसीहत दी कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करना हम सबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जिससे देश की जनता का इस महान संस्था के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
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