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सुपौल में कोसी का कटाव, कई घर नदी में समाए:लोग खुद पक्के मकान तोड़कर ईंट-सरिया बचाने को मजबूर, 5 डिसमिल जमीन की मांग
सुपौल जिला मुख्यालय के घूरन पंचायत के वार्ड नंबर-6 में कोसी नदी का कटाव लगातार तेज हो रहा है। नदी किनारे बसे परिवारों के सामने घर और जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है। कई घर कटाव की चपेट में आकर नदी में समा चुके हैं, जबकि दर्जनों मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। कटाव से डरे लोग अपने घरों का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। कुछ परिवार नदी की जद में आ चुके पक्के मकानों को खुद तोड़कर ईंट और सरिया निकालने को मजबूर हैं। कटावरोधी कार्य और पुनर्वास की मांग कटाव प्रभावित परिवारों की समस्या को लेकर कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी के नेतृत्व में मंगलवार को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने भी शामिल होकर प्रभावित परिवारों का समर्थन किया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने, राहत उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की गई। हर साल कटाव, अब तक स्थायी समाधान नहीं मिन्नत रहमानी ने कहा कि कई वर्षों से कोसी के प्रकोप से प्रभावित लोग प्रशासन, आपदा विभाग और बिहार सरकार से समाधान की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि हर साल दर्जनों गांव कोसी के कटाव की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि घूरन से करीब दस मिनट की दूरी पर जिला समाहरणालय है, इसके बावजूद कटाव अब लोगों के घरों तक पहुंच गया है। उनके मुताबिक, एक बार घर कटना शुरू हो जाए तो उसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। समय रहते फ्लड फाइटिंग टीम निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार काम करे तो कटाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अनुभवहीन ठेकेदारों से काम कराने का आरोप रहमानी ने आरोप लगाया कि फ्लड फाइटिंग का काम ऐसे ठेकेदारों को दिया जाता है, जिन्हें नदी की धारा और कटाव रोकने का पर्याप्त अनुभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि लकड़ी के मोटे बंडल, पाइपिंग और अन्य तकनीकी उपायों के साथ विशेषज्ञों की निगरानी में काम कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों ने मेहनत से पक्के मकान बनाए थे, लेकिन अब वे अपनी आंखों के सामने आशियाना उजड़ता देख रहे हैं। स्थिति यह है कि कुछ लोग अपने ही पक्के मकानों को तोड़कर ईंट और सरिया सुरक्षित स्थान पर ले जाने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों को पांच डिसमिल जमीन देने की मांग रहमानी ने कहा कि यदि प्रशासन घरों को बचाने में सफल नहीं होता है तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित गरीब परिवार को कम से कम पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराकर सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की। इसके साथ ही प्रभावित लोगों के लिए तत्काल भोजन, रसोई और अस्थायी आवास की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। जिओ बैग और बोल्डर से सुरक्षा की मांग ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराने और विशेषज्ञ टीम से कटाव की स्थिति का आकलन कराने की मांग की है। साथ ही नाव, राहत सामग्री और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने की मांग भी उठी है। कटाव रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर बोल्डर, जिओ बैग समेत अन्य तकनीकी उपायों से सुरक्षा कार्य कराने की मांग की गई। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी मिन्नत रहमानी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि अपना घर और जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे आम लोगों की मांग है।
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