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स्कूटर पर पहुंचे मेयर से मांगा ज्यादा पार्किंग शुल्क:जगदीश चौक में पकड़ी पार्किंग ठेकेदार की मनमानी, बोले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करेंगे
उदयपुर में पर्यटकों से पार्किंग शुल्क के नाम पर मनमानी और अभद्र व्यवहार की शिकायतों पर महापौर पारस सिंघवी ने मंगलवार को खुद मोर्चा संभाला। वे स्कूटर लेकर जगदीश चौक स्थित आसींद की हवेली के ऊपरी तल पर संचालित पार्किंग में पहुंचे। यहां निरीक्षण के दौरान निर्धारित दरों से अधिक शुल्क मांगने, शुल्क सूची प्रदर्शित नहीं करने और पर्यटकों से अभद्र व्यवहार की अनियमितताएं सामने आईं। इस पर महापौर ने संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और पार्किंग का संचालन नगर निगम के हाथों में लेने के निर्देश दिए। महापौर सिंघवी ने पार्षद विजय आहूजा और वैभव भंडारी के साथ पार्किंग का निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं की हकीकत जानने के लिए महापौर खुद स्कूटर लेकर पहुंचे। सिंघवी ने स्वयं स्कूटर पार्क करने के दौरान जब पार्किंग शुल्क जमा करवाया, तब कर्मचारी द्वारा निर्धारित राशि से अधिक शुल्क की मांग की गई। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि पार्किंग स्थल पर नगर निगम की ओर से निर्धारित शुल्क दरों की सूची प्रदर्शित नहीं की गई थी। इससे पर्यटकों को सही दरों की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसके अलावा पार्किंग कर्मचारी के पर्यटकों से अभद्र व्यवहार करने की शिकायत भी सामने आई। अनियमितताएं मिलने पर महापौर ने मौके पर ही राजस्व अधिकारी नितेश भटनागर, राजस्व निरीक्षक विजय जैन और निगम पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी को बुलाकर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और उसे ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए। महापौर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली और आमजन या पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जगदीश चौक शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। ऐसे स्थान पर पार्किंग व्यवस्था सुव्यवस्थित होना और पर्यटकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार जरूरी है। अब नगर निगम खुद संभालेगा पार्किंग महापौर ने निर्देश दिए कि वर्तमान ठेकेदार की सेवाएं समाप्त कर पार्किंग का संचालन नगर निगम के कर्मचारियों के माध्यम से करवाया जाए। इससे निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क वसूली और व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को शहर के अन्य पार्किंग स्थलों पर भी निर्धारित शुल्क दरों की सूची प्रदर्शित करवाने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए।
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