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सहारनपुर में रोहिणी पर भड़कीं अभिनेत्री उर्मिला सनावर:बोलीं- वह दलित समाज को बांट रही, चंद्रशेखर ने अगर गलत किया है तो कोर्ट जाएं
सहारनपुर में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने रविवार को अपने घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने डॉक्टर रोहिणी के हालिया बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि व्यक्तिगत विवाद को अब समाज के बीच लाकर दलित समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। उर्मिला ने कहा कि वह खुद दलित समाज से आती हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल डॉक्टर रोहिणी के समर्थन में आवाज उठाने के कारण उन्हें भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े लोगों की ओर से दर्ज मुकदमों का सामना करना पड़ा था। पहले रोहिणी की आवाज उठाई, मेरे खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे उर्मिला के मुताबिक, जब पिछले साल डॉक्टर रोहिणी और चंद्रशेखर आजाद के बीच विवाद चल रहा था, तब उन्होंने सबसे पहले रोहिणी के पक्ष में आवाज उठाई थी। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद नगीना, पतेपुर और सहारनपुर समेत अलग-अलग जगह उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि उस समय विवाद व्यक्तिगत था, लेकिन अब डॉक्टर रोहिणी के बयानों से उन्हें लगा कि यह मामला समाज के बीच पहुंच गया है। उर्मिला ने कहा कि दलित समाज को अलग-अलग जातियों में बांटना गलत है। उन्होंने डॉक्टर रोहिणी के वाल्मीकि समाज से राजनीतिक नेतृत्व को लेकर दिए गए कथित बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीति में नेतृत्व किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि योग्यता और संघर्ष से तय होता है। मायावती का उदाहरण देते हुए उर्मिला ने कहा कि वह व्यापक दलित समाज के समर्थन से राजनीति में आगे बढ़ीं और चार बार मुख्यमंत्री रहीं। उर्मिला ने संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि और डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने समाज को जोड़ने की बात की। उन्होंने कहा कि जातीय विभाजन की राजनीति से दलित समाज कमजोर होगा। उन्होंने डॉक्टर रोहिणी की विदेश में पढ़ाई और छात्रवृत्ति का भी जिक्र किया। उर्मिला ने दावा किया कि उन्हें मिली छात्रवृत्ति आरक्षण व्यवस्था के कारण मिली। उन्होंने कहा कि वंचित समाज के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देने वाली व्यवस्था को खत्म करने की बात करने वालों का समर्थन करना समाज के हित में नहीं है। अगर आरोप सही हैं तो पुलिस और कोर्ट जाएं चंद्रशेखर आजाद पर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों पर उर्मिला ने कहा कि यदि उनके खिलाफ शारीरिक शोषण या अन्य कोई अपराध हुआ है तो पीड़िता को पुलिस और कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जांच में चंद्रशेखर आजाद दोषी पाए जाते हैं तो वह उनके खिलाफ कार्रवाई के समर्थन में सबसे पहले खड़ी होंगी। हालांकि, उनका कहना था कि आरोपों के आधार पर पूरे समाज, संगठन या राजनीतिक दल को निशाना बनाना उचित नहीं है। कहा- मैंने रोहिणी के लिए मुकदमे झेले, उन्होंने मेरे लिए वीडियो तक नहीं बनाया उर्मिला ने अपने पुराने आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मनीषा वाल्मीकि, हाथरस और उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों में आवाज उठाई है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी पीड़ित की जाति या धर्म देखकर आवाज नहीं उठाई। उर्मिला ने सवाल किया कि जब वह खुद कई दिनों तक गायब रहीं और अंडरग्राउंड रहने की बात सामने आई, तब डॉक्टर रोहिणी ने उनके समर्थन में एक वीडियो तक नहीं बनाया। उर्मिला ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद की ओर से करीब एक साल पहले उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था। उनके मुताबिक, जब वह डॉक्टर रोहिणी के समर्थन में मुजफ्फरनगर में आंदोलन कर रही थीं, तब नगीना से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भेजा गया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें नगीना से और उनके पति सुरेश राठौड़ को ज्वालापुर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, खुद को भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्ता बताते हुए उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। मैं भाजपा के साथ हूं, समाज के नाते चंद्रशेखर के साथ उर्मिला ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी की निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और आगे भी भाजपा के साथ रहेंगी। उन्होंने दावा किया कि वह सहारनपुर से मेयर पद की दावेदार रही हैं और नगीना लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की थी। उन्होंने कहा, “मेरे लिए पार्टी बाद में आती है, सबसे पहले मेरा समाज है। चंद्रशेखर आजाद मेरे समाज के हैं, इसलिए मैं उनके साथ खड़ी हूं।” भाजपा और चंद्रशेखर आजाद के समर्थन को लेकर उठ रहे सवालों पर उर्मिला ने कहा कि वह दो नाव पर सवार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा की विचारधारा और नीतियों से प्रभावित हैं और पार्टी के लिए काम करती रही हैं, लेकिन किसी व्यक्ति पर लगे आरोप और पूरे समाज को निशाना बनाने में अंतर है। उन्होंने कहा कि यदि चंद्रशेखर ने कोई गलत काम किया है तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन पूरे भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी या समाज को आरोपी की तरह पेश करना उचित नहीं है। मेरे खिलाफ दर्ज करीब 10 मुकदमे खत्म हुए उर्मिला ने भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का धन्यवाद भी किया। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज करीब 10 मुकदमे हाल ही में खत्म किए गए हैं और उनके मुताबिक ये मुकदमे निराधार थे। उन्होंने कहा कि भाजपा में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो पार्टी की छवि खराब करते हैं, लेकिन पार्टी ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। उर्मिला ने कहा कि वह भाजपा की नीतियों के साथ हैं, लेकिन समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राय रखती रहेंगी। व्यक्तिगत विवाद को जातीय विवाद न बनाया जाए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उर्मिला ने कहा कि डॉक्टर रोहिणी और चंद्रशेखर आजाद के बीच यदि विवाद व्यक्तिगत है तो उसे कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि व्यक्तिगत विवाद को जातीय और सामाजिक विवाद में बदलने से दलित समाज में विभाजन पैदा होगा। उन्होंने दोहराया कि यदि चंद्रशेखर आजाद ने कोई अपराध किया है तो कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन आरोपों के आधार पर पूरे समाज और संगठन को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
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