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ओणम: अन्न के साथ अन्नदाता का भी करे सम्मान: स्वामी चिदानन्द
ओणम पर्व पर प्रकृति, अन्न और मानवता के सम्मान का संदेश ऋषिकेश। भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परंपरा में पर्व जीवन-दर्शन, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता के जीवंत उत्सव हैं। ओणम ऐसा ही एक अनुपम महापर्व है, जो केरल की धरती से निकलकर आज सम्पूर्ण भारत की ‘विविधता में एकता’ की विराट चेतना का प्रतीक बन चुका है। ओणम मुख्यतः फसल, समृद्धि और अन्न के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। मलयालम पंचांग के चिंगम मास में अथम से आरंभ होकर तिरुवोणम तक दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव आज केवल केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वभर ...
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