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निधि शुक्ला बोलीं- अमरमणि को टिकट मिला तो कोर्ट जाऊंगी:राजनीतिक दल आपराधिक व्यक्ति को पार्टी में न लें; नहीं तो आंदोलन होगा
कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या करने वाले अमरमणि त्रिपाठी के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा चल रही है। इसको लेकर मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने विरोध जताया। लखीमपुर में निधि ने कहा- किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को कांग्रेस में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी राजनीतिक दल ने अमरमणि त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारा, तो मैं महिला आयोग में शिकायत करूंगी, कोर्ट जाऊंगी। आंदोलन करूंगी। निधि शुक्ला रविवार दोपहर करीब 2 बजे मीडिया से बात कर रही थीं। बोलीं- फरेंदा में अमरमणि के स्वागत से आहत हूं निधि ने कहा- 8 सितंबर को महराजगंज के फरेंदा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त आए थे। इस दौरान अमरमणि त्रिपाठी के स्वागत और कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा सामने आई थी। मैं इससे वह बेहद आहत हूं। साल- 2004 में मधुमिता हत्याकांड की पैरवी शुरू करने के दौरान मैंने उस समय की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। सोनिया गांधी ने मेरी बात सुनकर न्याय की लड़ाई में सहयोग करने का भरोसा दिया था। ‘प्रियंका गांधी ने भी अमरमणि से किनारा किया था’ निधि ने कहा- उस समय कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी ने भी अमरमणि त्रिपाठी से दूरी बनाए रखी थी। मैं खुद भी कांग्रेस पार्टी की सदस्य हूं। हमारा पार्टी नेतृत्व महिला सम्मान और उच्च राजनीतिक आदर्शों की बात करता है। ऐसे में अमरमणि त्रिपाठी को कांग्रेस से जोड़ने की किसी भी कोशिश को मैं स्वीकार नहीं करूंगी। ‘बहन के लिए 25 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं’ निधि शुक्ला ने कहा- मधुमिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में मेरे जीवन के करीब 25 साल बीत चुके हैं। अब मैं अमरमणि को राजनीतिक संरक्षण देने के किसी भी राजनीतिक दल के कदम का विरोध करूंगी। अगर किसी दल ने उन्हें शामिल किया या चुनाव लड़ाने का प्रयास किया, तो मैं उस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने धरना, अनशन और आंदोलन करूंगी। निधि ने निर्वाचन आयोग को भी लेटर भेजा निधि शुक्ला ने यूपी विधानसभा चुनाव- 2027 को लेकर राज्य चुनाव आयुक्त को भी लेटर भेजा। इसमें उन्होंने अमरमणि त्रिपाठी की चुनावी पात्रता और उनके खिलाफ पेंडिंग आपराधिक मामले का जिक्र किया। चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले मामले को रिकॉर्ड पर लेने की मांग की। निधि ने कहा- मधुमिता शुक्ला की 9 मई, 2003 को लखनऊ के महानगर थाना क्षेत्र में हत्या हुई थी। मामले की जांच सीबीआई ने की थी। विशेष सीबीआई कोर्ट (देहरादून) ने 24 अक्टूबर, 2007 को अमरमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, साल 2023 में उन्हें रिमिशन के आधार पर जेल से रिहा किया गया। लेटर में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) का हवाला देते हुए निधि ने दावा किया है कि अमरमणि की चुनाव लड़ने की अयोग्यता 2029 तक प्रभावी है। इसके साथ ही बस्ती में दर्ज अपहरण के एक मामले का भी उल्लेख किया गया है। निधि का आरोप है कि बस्ती के मामले में अमरमणि के खिलाफ कोर्ट से संबंधित कार्रवाई लंबित है। उन्होंने अपराधी घोषित करने और संपत्ति कुर्की के आदेश का भी जिक्र लेटर में किया है। राजनीतिक गतिविधियों पर भी सवाल निधि शुक्ला ने आरोप लगाया कि इन मामलों के बावजूद अमरमणि महराजगंज के नौतनवा और फरेंदा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में दिखाई दे रहे हैं। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अमरमणि के नामांकन की पात्रता की जांच कराई जाए। साथ ही राजनीतिक दलों को भी ऐसे व्यक्ति को टिकट देने से बचना चाहिए। --------------------------- ये यूपी एक्सप्लेनर पढ़ें - मुख्तार के रिश्तेदारों की संपत्ति हाईकोर्ट ने क्यों रिलीज की, क्या कमजोर है यूपी का गैंगस्टर एक्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क मुख्तार अंसारी के रिश्तेदारों की संपत्तियां रिलीज कर दीं। एक अन्य मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को ‘स्टिलबॉर्न’ (पैदा होते ही मर जाना) यानी ‘मरा हुआ कानून’ बताया। महाराष्ट्र के ‘मकोका’ और गुजरात के ‘गुजसीटॉक’ कानूनों से तुलना करते हुए गैंगस्टर एक्ट की कानूनी खामियों की ओर इशारा किया। पढ़िए पूरी खबर...
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