top
नोएडा में कूड़े से बनेगा ईंधन और बिजली:100 टन क्षमता का प्लांट,बुलगारिया और चीन में लगे है प्लांट, थर्मोलिसिस तकनीक पर करेगा काम
नोएडा में रोज निकलने वाले हजारों टन कूड़े के निवारण के लिए प्राधिकरण ने बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में सेक्टर-145 साइट-ए पर 100 टन प्रतिदिन क्षमता का इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी एंड रिसोर्स रिकवरी प्लांट लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह प्लांट थर्मोलिसिस आधारित तकनीक पर काम करेगा। इसमें कूड़े को जलाने के बजाय रासायनिक प्रक्रिया से अलग-अलग उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। प्राधिकरण की ओर से सेक्टर-145 में पहले से रिक्लेम की गई जमीन पर करीब 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। जमीन का किराया 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष रखा गया है। प्लांट लगाने और संचालन का पूरा खर्च संबंधित कंपनी लिमिटेड उठाएगी। यानी इस परियोजना पर नोएडा प्राधिकरण को कोई वित्तीय भार नहीं उठाना पड़ेगा। रोज 100 टन सूखा कूड़ा होगा प्रोसेस प्लांट में हर दिन करीब 100 टन सूखा कूड़ा और आरडीएफ प्रोसेस किया जाएगा। इसमें प्लास्टिक, कागज, कांच से जुड़े सूखे कचरे के अलावा पैकेजिंग सामग्री, सिलिकॉन या पॉलिमर लेप वाले फास्ट-फूड कंटेनर और टेट्रा पैक जैसे कचरे को भी शामिल किया जा सकेगा। इससे बड़ी मात्रा में सूखा कूड़ा लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा और उससे उपयोगी उत्पाद तैयार होंगे। कूड़े से बनेगा ईंधन, गैस और बिजली प्लांट में कूड़े की थर्मोलिसिस प्रक्रिया से कई उत्पाद तैयार किए जाएंगे। प्रस्ताव के मुताबिक करीब 75 टन प्रतिदिन पाइरोलिसिस ईंधन, करीब 9 टन प्रतिदिन ऊर्जा गैस और एलपीजी तथा लगभग 1.5 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता बताई गई है। तैयार ईंधन को आगे शोधन के बाद पेट्रोल, डीजल, ईंधन तेल और तार जैसे उत्पादों में बदला जा सकेगा। इसके अलावा इसे सीमेंट और स्टील उद्योगों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गैस का इस्तेमाल प्लांट चलाने या बिजली बनाने में होगा। 85-90% तक उपयोगी उत्पाद निकालने का दावा इस तकनीक में कूड़े को जलाया नहीं जाएगा और कुल इनपुट कचरे का करीब 85 से 90 प्रतिशत तक हिस्सा अलग-अलग उत्पादों के रूप में प्राप्त किया जा सकेगा। इससे कचरे की मात्रा कम करने के साथ-साथ उससे आर्थिक उपयोग के उत्पाद तैयार करने में मदद मिलेगी। 16 महीने में तैयार होगा प्लांट कंपनी के अनुसार प्लांट की स्थापना में करीब 16 महीने का समय लगेगा। इसके बाद इसका संचालन 12 साल और अतिरिक्त 3 साल की अवधि यानी कुल 15 साल तक करने का प्रावधान प्रस्ताव में रखा गया है। प्लांट को डोर-टू-डोर कलेक्शन से मिलने वाला सूखा कूड़ा उपलब्ध कराया जाएगा। विदेशों में चल रहे हैं ऐसे प्लांट कंपनी ने प्रस्ताव में बताया है कि उसकी यह तकनीक पहले से इस्तेमाल में है। बुल्गारिया में 30-30 टन प्रतिदिन क्षमता के दो प्लांट, चीन में 40 टन प्रतिदिन और बेलारूस में 30 टन प्रतिदिन क्षमता का एक प्लांट संचालित है। नोएडा में लगाया जाने वाला प्लांट भारत में इस तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट होगा। नोएडा में रोज 1100-1200 टन कूड़ा निकलता है प्राधिकरण के अनुसार नोएडा क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 1100 से 1200 टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए पहले से 300 टन प्रतिदिन क्षमता का इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट प्रस्तावित है। इसके अलावा छह विकेंद्रीकृत प्लांट भी लगाए जाने हैं, जिनमें जैविक कूड़े से गैस बनाने और सूखे कूड़े को अलग कर उपयोगी बनाने की व्यवस्था होगी।
Read full article on Bhaskar