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मतदाता की मूक क्रांति : सत्ता की मनमानी के खिलाफ काडर का खुला विद्रोह
राजस्थान के ताजा नगर निकाय चुनावों के जो तेवर सामने आए हैं, वे हमारे देश के संपूर्ण राजनीतिक तंत्र की आंखें खोलने के लिए काफी हैं। दशकों से हमारी तथाकथित राष्ट्रीय और प्रांतीय पार्टियों ने मतदाताओं को अपनी बपौती समझ रखा है। वे सोचते हैं कि बंद कमरों में बैठकर जिसे चाहे 'टिकट' थमा दो, मतदाता के पास सिंबल पर ठप्पा लगाने के सिवा चारा ही क्या है? लेकिन इस बार मरुधरा के मतदाताओं ने दलों के इस खोखले अहंकार को भीतर तक हिला दिया है।
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