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मेरठ के इलेक्ट्रानिक बस परिचालकों की हडलात जारी:दूसरे दिन भी वेतन न मिलने के कारण नहीं चली 45 बसें, यात्री परेशान
मेरठ में वेतन नहीं मिलने के विरोध में इलेक्ट्रिक बसों के परिचालकों की हड़ताल शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही। परिचालकों के काम ठप करने से शहर में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पूरी तरह प्रभावित रहा। लोहियानगर स्थित बस डिपो में परिचालक धरना देकर बैठे रहे और वेतन भुगतान की मांग को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई। इलेक्ट्रिक सिटी बसों का संचालन शहर के छह प्रमुख रूटों पर किया जाता है। इन रूटों पर रोजाना करीब 45 बसें चलती हैं। शुक्रवार से बसों का संचालन बंद होने के कारण मेडिकल से बेगमपुल मेट्रो स्टेशन, मोदीपुरम, मेरठ साउथ, सिटी स्टेशन समेत विभिन्न रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शनिवार को भी बसें नहीं चलने से यात्रियों को ऑटो, ई-रिक्शा और दूसरे सार्वजनिक वाहनों का सहारा लेना पड़ा। इससे यात्रियों को अतिरिक्त किराया भी खर्च करना पड़ा। वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट परिचालकों का कहना है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि कई बार संबंधित जिम्मेदारों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके बाद मजबूर होकर हड़ताल शुरू करनी पड़ी। परिचालकों ने स्पष्ट किया कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक वेतन का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे बसों का संचालन नहीं करेंगे। उनका कहना है कि वेतन मिलने के बाद ही काम पर वापस लौटेंगे। दूसरे दिन भी यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें इलेक्ट्रिक बसों का लगातार दूसरे दिन संचालन बंद रहने से शहर के प्रमुख रूटों पर यात्रियों को परेशानी हुई। बसों के इंतजार में यात्री डिपो और निर्धारित स्टॉप पर खड़े रहे। बस नहीं मिलने पर कई यात्रियों को ऑटो और ई-रिक्शा से सफर करना पड़ा। गतिरोध खत्म कराने की चुनौती लोहियानगर डिपो में परिचालकों के धरने के चलते बसों का संचालन बहाल नहीं हो सका। अब संबंधित अधिकारियों के सामने परिचालकों की मांग का समाधान कर गतिरोध खत्म कराने और इलेक्ट्रिक बसों को दोबारा सड़कों पर उतारने की चुनौती है। परिचालकों ने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
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