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मलेशिया में नौकरी का झांसा देकर ले जाने का आरोप, छह महीने से मजदूरी कराने का दावा
मलेशिया में नौकरी का झांसा देकर ले जाने का आरोप, छह महीने से मजदूरी कराने का दावा मुजफ्फरनगर के रमजान ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी का लगाया आरोप, 1.70 लाख रुपये लेकर भेजने का दावा; पासपोर्ट और वर्क परमिट को लेकर भी उठे सवाल मुजफ्फरनगर। जानसठ तहसील के गांव किशनपुर निवासी 28 वर्षीय रमजान ने आरोप लगाया है कि उसे मलेशिया में अच्छी नौकरी और 50 हजार रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर मानव तस्करी के जाल में फंसाया गया। रमजान का दावा है कि उससे 1.70 लाख रुपये लेने के बाद उसे मलेशिया भेजा गया , जहां छह महीने तक अलग-अलग कंपनियों में उससे 12 घंटे से अधिक काम कराया गया, लेकिन मेहनताना नहीं दिया गया। उसने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट और धमकी भी दी गई। रमजान के मुताबिक, सिकरेड़ा निवासी तालिब और तैय्यब ने उसे मलेशिया में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। तालिब ने बताया था कि उसका भाई गय्युर मलेशिया में रहता है और वह वहां अच्छी नौकरी लगवा देगा। रमजान का कहना है कि उसने 18 जनवरी को 50 हजार, 21 जनवरी को एक लाख और 22 जनवरी को 20 हजार रुपये देकर कुल 1.70 लाख रुपये दिए। यह रकम उसने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर जुटाई थी। मेडिकल के बाद मलेशिया भेजने का दावा रमजान के अनुसार, तालिब, तैय्यब और ईशा उसे मेडिकल कराने दिल्ली ले गए। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वह दिल्ली एयरपोर्ट से मलेशिया के लिए रवाना हुआ और 24 जनवरी को वहां पहुंचा। उसका आरोप है कि मलेशिया पहुंचने के बाद जावेद ने पासपोर्ट और टिकट की कॉपी यह कहकर ले ली कि विदेशी मुद्रा बदलवाने के लिए इसकी जरूरत है। रमजान का कहना है कि इसके बाद उसका पासपोर्ट और पैसा वापस नहीं किया गया। बादाम पैकिंग के बजाय कराया लोडिंग का काम रमजान का आरोप है कि उसे बादाम पैकिंग का काम बताए जाने के बावजूद जावेद ने एक कंपनी में प्लाईवुड के पार्सल लोड-अनलोड कराने शुरू कर दिए। विरोध करने पर उसे खाना तक नहीं दिया गया। इसके बाद उससे करीब एक महीने तक लोडिंग का काम कराया गया, लेकिन वेतन नहीं मिला। उसके बाद उसने बोतल के ढक्कनों पर स्टिकर लगाने और पैकिंग का काम किया। रमजान के मुताबिक, अलग-अलग कंपनियों में काम कराने के दौरान उससे कार्ड पर हस्ताक्षर कराए जाते रहे और भुगतान का भरोसा दिया गया, लेकिन उसे मजदूरी नहीं मिली। इसके बाद करीब दो महीने तक सब्जी पैकिंग और फिर दूसरी कंपनी में भारी पार्सल लोड-अनलोड कराने का काम कराया गया। मारपीट और धमकी देने का भी आरोप रमजान ने आरोप लगाया कि तबीयत खराब होने पर काम पर नहीं जाने से नाराज जावेद ने उसके साथ मारपीट की। उसके मुताबिक, अन्य मजदूरों ने भी घटना देखी। उसका यह भी आरोप है कि ईशा फोन पर धमकी देता था कि अगर वह कहीं गया या किसी को कुछ बताया तो पुलिस उसे पकड़ लेगी। रमजान का कहना है कि वह मौका देखकर सब्जी पैकिंग कंपनी से निकल गया और बाद में जावेद के बैग से अपना पासपोर्ट निकाल लिया। हालांकि, वर्क परमिट नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद उसे मलेशिया में पुलिस कार्रवाई का डर सताने लगा। परिवार से भी संपर्क टूटने का दावा रमजान का आरोप है कि उसे टूरिस्ट वीजा पर मलेशिया ले जाया गया था और वर्क परमिट दिलाने का भरोसा पूरा नहीं हुआ। वहीं, परिवार ने उसके लिए रकम उधार ली थी, जिसका कर्ज अब तक चुकता नहीं हुआ है। रमजान का कहना है कि आरोपितों ने उसके परिवार को यह बताया कि वह मलेशिया में करोड़ों रुपये कमा रहा है, जबकि वह वहां मुश्किल परिस्थितियों में रह रहा है। पुलिस और प्रशासन से शिकायत का दावा रमजान ने अपनी आपबीती नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर को बताई है। संगठन की ओर से मुजफ्फरनगर पुलिस और जिला प्रशासन के साथ-साथ मलेशिया हाई कमीशन को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजे जाने का दावा किया गया है। भारत सरकार के संबंधित मदद पोर्टल पर भी शिकायत किए जाने की बात कही गई है। रमजान का कहना है कि वह मलेशिया में फंसा हुआ है और वतन वापसी तथा बंधुआ मजदूरी से मुक्ति का इंतजार कर रहा है। मामले में लगाए गए मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, मारपीट और धमकी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अथवा प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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