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Maharashtra: हीमोग्लोबिन की कमी की वजह से अस्पताल में भर्ती हुई लड़की, तीन बार हुआ प्रेग्नेंसी टेस्ट, पॉजिटिव आई रिपोर्ट, परिवार ने क्या कहा?
Maharashtra News: महाराष्ट्र के केडीएमसी के शास्त्रीनगर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची एक नाबालिग लड़की को कथित तौर पर गर्भवती बताए जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है. हीमोग्लोबिन की कमी के कारण अस्पताल में भर्ती इस नाबालिग लड़की की एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाने का दावा उसके परिजनों ने किया है. इतना ही नहीं, केडीएमसी की जांच प्रक्रिया के दौरान कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर में कराई गई जांच में भी गर्भावस्था की रिपोर्ट पॉजिटिव आने की बात कही जा रही है. हालांकि, परिजनों का दावा है कि बाहर से कराए गए प्रेग्नेंसी टेस्ट में रिपोर्ट निगेटिव आई है. जांच कर कार्रवाई की हुई मांग इस मामले का खुलासा भाजपा नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने किया है. उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. परिजनों का कहना है कि इस घटना से नाबालिग लड़की को मानसिक रूप से बड़ा आघात पहुंचा है. लड़की के परिवार के अनुसार अस्पताल में उसका 3 बार प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाया गया और बताया गया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इससे उन्हें काफी सदमा लगा. बाद में जब डोंबिवली के एक प्राइवेट लैब में टेस्ट करवाया गया, तो रिपोर्ट निगेटिव आई. परिवार ने प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा शास्त्रीनगर अस्पताल को इलाके का अहम हेल्थ सेंटर माना जाता है. ऐसे में इस लापरवाही को लेकर परिवार ने प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है. मामले को लेकर मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की ओर से किसी भी नाबालिग का परीक्षण करते समय माता-पिता से लिखित सहमति लेना जरूरी है. इसके अलावा कभी-कभी लैब में इस्तेमाल की जाने वाले किट की क्वालिटी, स्टोरेज और टेक्निशीयन की ट्रेनिंग में अंतर भी रिपोर्ट में गड़बड़ी का कारण बन सकती है. अगर 2 अलग-अलग जगहों से अलग-अलग रिपोर्ट्स मिलती हैं, तो ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और एक्सपर्ट डॉक्टर की ओर से इसकी पुष्टि करना जरूरी है. फिलहाल परिवार ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है.
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