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काश! देश न भी होता, मगर, भारत माँ होती।
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो। काश काश! देश न भी होता, मगर, भारत माँ होती। संविधान न भी होता, मगर, अटल सिद्धान्त होते।। काश! चिड़ियाओं का खुला- नीला अंबर होता, मछलियों के तैरने का समंदर होता। कुछ लोग कहते हैं, अंबर-समंदर तो आज भी होते हैं। मगर, पूछो उन चिड़ियाओं से, जिनका अंबर बिजलियों की तारो ...
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