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कानपुर में EPFO का बड़ा एक्शन:1160 कंपनियों को भेजा नोटिस, कर्मचारियों के नाम तुरंत जोड़ने के निर्देश
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने कर्मचारियों के पीएफ अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I, शाहिद इकबाल ने जब कंपनियों के कर्मचारी रेमिटेंस और चालानों की जांच की, तो एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई। कई कंपनियों ने पिछले महीनों की तुलना में अपने चालानों में दर्ज कर्मचारियों की संख्या अचानक कम कर दी थी। यानी कई कर्मचारियों को पीएफ और सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर कर दिया गया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ईपीएफओ ने तुरंत कार्रवाई की और कानपुर मंडल की 1,160 कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है। इन औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियों पर गिरेगी गाज ईपीएफओ ने यह पत्र विशेष रूप से प्रमुख औद्योगिक इलाकों में चल रही कंपनियों को भेजे हैं। इनमें उन्नाव का लेदर क्लस्टर, पनकी-दादानगर, रूमा, जाजमऊ, कानपुर देहात, फतेहपुर और झांसी के औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। ईपीएफओ ने इन सभी प्रतिष्ठानों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने रिकॉर्ड की दोबारा जांच करें और छूट गए हर पात्र कर्मचारी को तुरंत ईपीएफओ से जोड़ें। EEC-2026 अभियान,कंपनियों के लिए पेनल्टी से बचने का मौका ईपीएफओ ने 'कर्मचारी नामांकन अभियान (EEC-2026)' शुरू किया है। इसके तहत जिन कंपनियों से पहले कर्मचारियों का नाम दर्ज करने में चूक हुई थी, वे अब बिना किसी बड़े दंड के उन्हें जोड़ सकती हैं। इस योजना के तहत कंपनियों को कर्मचारी के हिस्से के अंशदान में विशेष छूट दी जा रही है। मालिकों को केवल अपना हिस्सा, नियमानुसार ब्याज और महज 100 रुपये का प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा। ठेके पर काम कराने वाले सरकारी विभाग भी रखें ध्यान ईपीएफओ ने नगर निगम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), जिला शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी जैसे मुख्य नियोक्ताओं (प्रिंसिपल एम्प्लॉयर) को भी जिम्मेदारी सौंपी है। इन विभागों में ठेकेदारों के जरिए बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ईपीएफओ ने साफ कहा है कि अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि उनके यहां ठेके पर काम कर रहा कोई भी मजदूर या कर्मचारी पीएफ सुविधा से वंचित न रहे। ईपीएफओ की इस पहल का सीधा मकसद एक ही है। शहर का कोई भी पात्र कर्मचारी अपने सामाजिक सुरक्षा और पीएफ के हक से वंचित न रहे।
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