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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पैचवर्क उखड़ा, सड़क फिर धंसी:बारिश के बाद मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
उन्नाव में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हाल में कराए गए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को हुई बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में पैचवर्क उखड़ गया और सड़क दोबारा धंसने की शिकायत सामने आई। इससे तेज रफ्तार वाहनों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। एक्सप्रेसवे के किलोमीटर संख्या 61.9 पर तीसरी लेन में हाल ही में किया गया पैचवर्क पूरी तरह उखड़ गया। इसके अलावा दूसरी लेन और मरम्मत वाले हिस्से के बीच करीब 10 सेंटीमीटर का ऊंचाई अंतर भी दिखाई दे रहा है। इससे गुजरने वाले वाहनों को अचानक झटका लग रहा है। जगह-जगह गड्ढे, डिवाइडर भी धंसा एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क में गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। किलोमीटर संख्या 63.2 के पास डिवाइडर भी जमीन में धंस गया है। वहीं किलोमीटर संख्या 50 के आसपास सड़क की मरम्मत का काम अभी चल रहा है। इन स्थितियों से एक्सप्रेसवे के रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बारिश के बाद सामने आई खामियां मरम्मत और रखरखाव का काम पीएनसी कंपनी की ओर से किया जा रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर ऐसा पैचवर्क होना चाहिए, जो बारिश और लगातार वाहनों के दबाव को झेल सके। बारिश के तुरंत बाद मरम्मत वाले हिस्से के उखड़ने से काम की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जल निकासी और मूल सतह की जांच जरूरी बारिश के बाद सड़क दोबारा धंसने की स्थिति में यह भी सवाल उठ रहा है कि पैचवर्क से पहले सड़क की मूल सतह और जल निकासी व्यवस्था को ठीक से दुरुस्त किया गया था या नहीं। यदि नीचे की सतह में समस्या बनी रही हो तो केवल ऊपर से पैचवर्क करने से सड़क लंबे समय तक टिक नहीं सकती। जिम्मेदार एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल वाहन चालकों ने एक्सप्रेसवे की खराब होती स्थिति को देखते हुए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क की खामियों को समय रहते दूर नहीं किया गया तो तेज रफ्तार यातायात के बीच दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट हेड आरके मिश्रा ने बताया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद पहली बरसात में कहीं-कहीं छोटी-मोटी समस्याएं सामने आती हैं। एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर मिट्टी की भराई की जाती है। बारिश के दौरान मिट्टी के बैठने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि मौके पर मौजूद तकनीकी टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ तत्काल सुधार कार्य में जुट जाती हैं, ताकि आवागमन बाधित न हो। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित मानकों का प्रयोग किया गया है। दक्ष तकनीकी टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे पर आवागमन निर्बाध रूप से जारी है।
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