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जनदर्शन में सिंचाई,गैस-मुआवजा और बिजली की शिकायतें सामने आईं:बेटे की मौत पर नहीं मिली बीमा राशि, बिलासपुर कलेक्टर-एसएसपी ने सुनीं समस्याएं, निराकरण के निर्देश
बिलासपुर में साप्ताहिक जनदर्शन के दौरान सिंचाई, उज्ज्वला गैस, मुआवजा और बिजली से संबंधित कई शिकायतें सामने आईं। कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल और अपर कलेक्टर डॉ. ज्योति पटेल ने लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके निराकरण के निर्देश दिए। चिंगराजपारा निवासी गनेशिया मानिकपुरी ने शिकायत की है कि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत ऑफलाइन आवेदन करने के बावजूद, आवंटन सूची में नाम होने पर भी उन्हें अब तक गैस कनेक्शन नहीं मिला है। बेटे की मौत के बाद नहीं मिली बीमा राशि संतोष कुमार लोनिया ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अपने बेटे की सड़क हादसे में मौत के डेढ़ साल बाद भी बीमा राशि न मिलने की शिकायत की। उनके बेटे की मौत 23 दिसंबर 2024 को हुई थी। उन्होंने बताया कि आवश्यक दस्तावेज और जांच प्रक्रिया पूरी होने, संबंधित विभाग और न्यायालय को पत्राचार करने के बावजूद उन्हें 5 लाख रुपए की बीमा राशि नहीं मिली है। सिंचाई योजना का लाभ दिलाने की मांग ग्राम पंचायत भैसाझार के सरपंच ने गांव में उद्वहन सिंचाई योजना का लाभ दिलाने की मांग की। इसी तरह, तखतपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत लाखासार के सरपंच ने क्षतिग्रस्त विद्युत केबल से जुड़ी समस्या के तत्काल निराकरण का अनुरोध किया। मकान की मरम्मत के लिए मुआवजे की मांग रतनपुर तहसील के ग्राम बारीडीह निवासी कार्तिक राम यादव ने भारी बारिश से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए अपने मकान की मरम्मत के लिए मुआवजे की मांग की। उन्होंने बताया कि वे मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं और मरम्मत न होने के कारण उन्हें टूटे हुए मकान में ही रहना पड़ रहा है। हाइवे के लिए भूमि दी, मुआवजा नहीं मिला ग्राम बारीडीह के अनुराग कुमार जायसवाल ने एनएच-45 के निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि और मकान बाउण्ड्रीवाल के मुआवजे की राशि दिलाने की मांग की। उन्होंने कलेक्टर से लंबित मुआवजा राशि जल्द देने की मांग की। इसी तरह सकरी तहसील के केकराड़ निवासी शिवकुमार ध्रुव ने धान पर्ची में उनका नाम नाबालिग के रूप में दर्ज होने से हो रही समस्या के निराकरण की मांग की। उन्होंने बताया कि उनके पिता के नाम से दर्ज भूमि संबंधी रिकॉर्ड में उनका नाम नाबालिग के रूप में दर्ज है। इसलिए जांच कर धान पर्ची में आवश्यक सुधार कराया जाए।
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