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हाईकोर्ट ने खारिज की सतीश सनपाल की याचिकाएं, कहा, विदेश में होना जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता, एफआईआर कराने दाखिल की थी याचिकाएं
जबलपुर. एमपी में जबलपुर पुलिस ने सतीश सनपाल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. वह दुबई में रहकर लग्जरी लाइफ जी रहा है. सनपाल ने लगातार हाईकोर्ट से राहत की मांग की थी. सतीश सनपाल ने याचिकाएं दायर कर आग्रह किया था कि उसे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए. हाईकोर्ट ने सतीश सनपाल को झटका देते हुए उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को निरस्त करने की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं. सतीश सनपाल के खिलाफ जबलपुर के अलग-अलग थानों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे और अवैध बेटिंग से जुड़े छह मामले दर्ज हैं. इन्हें निरस्त कराने के लिए सतीश ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं. जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं. कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किए जाने वाले अपराधों में आरोपी का घटनास्थल या संबंधित देश में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं होना, उसे अपने आप आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता. राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कोर्ट के समक्ष दलीलें रखीं. जबलपुर के 4 थानों में दर्ज है 6 एफआइआर सतीश सनपाल की ओर से दाखिल याचिकाओं में जबलपुर के चार थानों में दर्ज कुल छह एफआईआर को चुनौती दी गई थी. इनमें ओमती थाने में तीन, सिविल लाइन्स थाने में एक, लॉर्डगंज थाने में एक और मदन महल थाने में एक एफआईओर शामिल है. याचिकाओं में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे से संबंधित आरोपों के आधार पर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई थी. 2020 से दुबई में रह रहा है सतीश सनपाल- याचिकाकर्ता सतीश सनपाल की ओर से दलील दी गई कि वह 14 मार्च 2020 से दुबई में रह रहा है और इसके बाद भारत नहीं आया. याचिका में दावा किया गया था कि उसकी गैरमौजूदगी में उसे बदनाम करने की नीयत से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के संबंध में अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई गईं. इसी आधार पर इन मामलों को निरस्त करने की मांग की गई थी. ऑनलाइन अपराध में विदेश में रहना बचाव नहीं- राहत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से संचालित अपराधों में केवल यह तथ्य कि आरोपी घटना के समय घटनास्थल या देश में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं था, उसे स्वत: अपराध की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता. कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों की विस्तृत जांच ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आती है. साक्ष्यों की जांच ट्रायल कोर्ट में होगी- हाईकोर्ट ने कहा कि सह आरोपी के बयान की विश्वसनीयता, गवाहों के मुकरने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जैसे सवालों का मूल्यांकन निचली अदालत द्वारा किया जाना है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 528 के तहत हाईकोर्ट मिनी-ट्रायल की तरह साक्ष्यों का मूल्यांकन नहीं कर सकता. कोर्ट ने माना कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोपों को पूरी तरह झूठा या असंभव माना जा सके. इसलिए इस स्तर पर एफआईआर व आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का कोई आधार नहीं बनता. छह याचिकाएं खारिज, ट्रायल जारी रहेगा- हाईकोर्ट ने सभी 6 याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि जबलपुर के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमों की कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी. साथ ही याचिकाकर्ता को ट्रायल के दौरान अपने सभी कानूनी बचाव और आपत्तियां प्रस्तुत करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है.
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