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गयाजी में पेपरलेस रजिस्ट्री पर डीड राइटरों का विरोध:नई व्यवस्था से 8 दिन में सिर्फ 5 रजिस्ट्री हुई, करीब 16 करोड़ के राजस्व का नुकसान
बिहार में नई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद विवाद गहरा गया है। गयाजी में डीड राइटरों ने मंगलवार को इस व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने काम बंद कर दिया है, जिससे सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बिहार दस्तावेज नवीन संघ के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद ने प्रेस वार्ता में बताया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक डीड राइटर काम नहीं करेंगे। डीड राइटरों का कहना है कि नई व्यवस्था से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है और आम लोगों को भी रजिस्ट्री कराने में परेशानी हो रही है। डीड राइटर्स ने पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में खामियां, धोखाधड़ी की आशंका जताई डीड राइटरों ने पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में कई खामियां और धोखाधड़ी की आशंका जताई है। वीरेंद्र प्रसाद ने कहा कि यदि कोई गड़बड़ी होती है, तो उसका ठीकरा डीड राइटरों पर फूट सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिस तरह पुराने कानून के तहत जमीन की रजिस्ट्री की जाती थी, उसी व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए। गयाजी जिले में 300 से अधिक डीड राइटर हैं, जिनके परिवारों का भरण-पोषण इसी पेशे से होता है। सरकार से कोई वेतन या आर्थिक सहायता नहीं मिलने के कारण रजिस्ट्री का काम प्रभावित होने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरकार को हर दिन 2 करोड़ के राजस्व का नुकसान डीड राइटरों के अनुसार, पेपरलेस रजिस्ट्री की नई व्यवस्था 17 अगस्त से लागू हुई है। उनका दावा है कि व्यवस्था लागू होने के आठ दिन बाद भी गया में इसके तहत अब तक मात्र पांच रजिस्ट्री ही हो सकी हैं। डीड राइटरों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में आवश्यक सुधार की मांग को लेकर है। डीड राइटरों ने दावा किया कि रजिस्ट्री का काम प्रभावित होने से गया जिले में सरकार को प्रतिदिन दो करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि यदि नई व्यवस्था को लेकर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कांग्रेस ने दिया डीड राइटरों को समर्थन डीड राइटरों की बैठक में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार जूना भी मौजूद रहे। उन्होंने डीड राइटरों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार के 141 निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री और बढ़े हुए रजिस्ट्री शुल्क को लेकर लोगों में परेशानी है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार ने कहा कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में किसान और मजदूर डिजिटल व्यवस्था से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। कई लोगों के पास डिजिटल सिग्नेचर, ओटीपी आधारित प्रक्रिया और स्क्रीन टच मोबाइल जैसी सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में अचानक पूरी व्यवस्था को डिजिटल करने से आम लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था के कारण राज्य के कई निबंधन कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ है और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को डीड राइटरों और आम लोगों की परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए। मांग नहीं मानी तो सड़क पर उतरने की चेतावनी कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार ने डीड राइटरों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को सड़क तक ले जाया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर सड़क जाम करने की भी चेतावनी दी। डीड राइटरों की प्रमुख मांग है कि पुरानी रजिस्ट्री व्यवस्था को बहाल किया जाए और बढ़ाए गए रजिस्ट्री शुल्क को वापस लिया जाए। सब-रजिस्ट्रार बोले- डिजिटल व्यवस्था में समय लगेगा वहीं, गया के जिला सब-रजिस्ट्रार सोमेश्वर कुमार ने डीड राइटरों के आरोपों पर कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद दस्तावेजों के निबंधन की प्रक्रिया जरूर थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन कार्यालय में प्रतिदिन कागजात प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और डिजिटल व्यवस्था नई होने के कारण लोगों को इसे समझने में थोड़ा समय लग रहा है। सब-रजिस्ट्रार ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था भविष्य की जरूरत है और जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को इससे कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल डीड राइटर सहयोग नहीं कर रहे हैं, लेकिन कार्यालय की ओर से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक पांच लोगों की पेपरलेस रजिस्ट्री हो चुकी है और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। फिलहाल डीड राइटरों के विरोध और प्रशासन के अपने रुख के बीच पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार डीड राइटरों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर जारी विरोध का समाधान किस तरह निकाला जाता है। सरकार से पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की सब रजिस्ट्रार ने डीड राइटरों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार के 141 निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री और बढ़े हुए रजिस्ट्री शुल्क को लेकर लोगों में परेशानी है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार ने कहा कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में किसान और मजदूर डिजिटल व्यवस्था से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। कई लोगों के पास डिजिटल सिग्नेचर, ओटीपी आधारित प्रक्रिया और स्क्रीन टच मोबाइल जैसी सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में अचानक पूरी व्यवस्था को डिजिटल करने से आम लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था के कारण राज्य के कई निबंधन कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ है और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को डीड राइटरों और आम लोगों की परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए। मांग नहीं मानी तो सड़क पर उतरने की चेतावनी कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार ने डीड राइटरों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को सड़क तक ले जाया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर सड़क जाम करने की भी चेतावनी दी। डीड राइटरों की प्रमुख मांग है कि पुरानी रजिस्ट्री व्यवस्था को बहाल किया जाए और बढ़ाए गए रजिस्ट्री शुल्क को वापस लिया जाए। सब-रजिस्ट्रार बोले- डिजिटल व्यवस्था में समय लगेगा वहीं, गया के जिला सब-रजिस्ट्रार सोमेश्वर कुमार ने डीड राइटरों के आरोपों पर कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद दस्तावेजों के निबंधन की प्रक्रिया जरूर थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन कार्यालय में प्रतिदिन कागजात प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और डिजिटल व्यवस्था नई होने के कारण लोगों को इसे समझने में थोड़ा समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल डीड राइटर सहयोग नहीं कर रहे हैं, लेकिन कार्यालय की ओर से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक पांच लोगों की पेपरलेस रजिस्ट्री हो चुकी है और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। फिलहाल डीड राइटरों के विरोध और प्रशासन के अपने रुख के बीच पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार डीड राइटरों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर जारी विरोध का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
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