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FPI की ‘घर वापसी’! जुलाई के बाद अगस्त में भी भारतीय शेयरों में विदेशी पैसों की बौछार
एनालिस्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन, शेयरों के वैल्यूएशन और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद ने विदेशी निवेशकों की धारणा बदलने में अहम भूमिका निभाई है.
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