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बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर क्या है? जिसके शिकार कक्षा 4 के छात्र ने की अश्लील हरकत, बहन से किया गंदा काम
Borderline Personality Disorder: कभी पढ़ाई के लिए हाथ में दिया गया मोबाइल कब बच्चे की दुनिया का सबसे जरूरी हिस्सा बन जाए, इसका पता कई बार माता-पिता को देर से चलता है. व्यवहार में अचानक बदलाव, घंटों अकेले रहना, मोबाइल छीनने पर असामान्य गुस्सा और उम्र के मुताबिक न दिखने वाली आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री में दिलचस्पी... ये संकेत अभिभावकों के लिए गंभीर चिंता का कारण हो सकते हैं. कई बार ये संकेत कम उम्र के बच्चों में भी हो सकते हैं. ऐसा ही मामला गोरखपुर से सामने आया है, जिसने माता-पिता को हैरान कर दिया. आइए जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला- गोरखपुर से सामने आए एक मामले में मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कक्षा 4 के एक बच्चे के व्यवहार में पिछले कुछ महीनों में बड़ा बदलाव देखा गया. परिवार के अनुसार, ऑनलाइन क्लास के लिए दिए गए मोबाइल का इस्तेमाल बाद में गेम और आपत्तिजनक सामग्री देखने के लिए होने लगा. स्कूल में भी उसके व्यवहार को लेकर शिकायत सामने आई. हद तो तब हो गई जब एक दिन बहन से गलत हरकत करते हुए मां ने देखा. यही नहीं, उस वक्त बच्चे के हाथ में जो मोबाइल था उसमें आपत्तिजनक वीडियो चल रही थी. जानकारी के मुताबिक, परिवार ने इसके बाद मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से इलाज शुरू कराया. कहा जा रहा है कि, बच्चा Borderline Personality Disorder (BPD) का शिकार है. 6 महीने से बदला बच्चे का व्यवहार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मां ने बताया कि बच्चे को ऑनलाइन क्लास के दौरान मोबाइल दिया गया था. वह पढ़ाई के बीच कुछ देर गेम खेलता था. अचानक पिछले 6 महीने से वह मोबाइल को हमेशा साथ रखने लगा. अगर मोबाइल लेते तो रोने लगता था. यहां तक कि बच्चा धीरे-धीरे बाथरूम में मोबाइल ले जाता और घंटों अंदर ही बैठा रहता. टोकने पर वह चिढ़चिढ़ाता और गुस्सा करता था. क्या बच्चा भी हो सकता BPD का शिकार राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक कुमार कहते हैं कि, कक्षा 4 के बच्चे के व्यवहार को सीधे BPD का परिणाम बताना सही नहीं है. इसके लिए किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह जरूरी है. दरअसल, BPD आमतौर पर किशोरावस्था के अंतिम दौर या वयस्कता में diagnosed होता है. 18 साल से कम उम्र में भी diagnosis संभव है, लेकिन लक्षण गंभीर हों और कम-से-कम एक साल से बने हों. क्या है Borderline Personality Disorder? Borderline Personality Disorder (BPD) एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को भावनाओं को नियंत्रित करने, अपने बारे में स्थिर धारणा बनाए रखने और रिश्तों को संभालने में परेशानी हो सकती है. इसमें मूड में तेज बदलाव, आवेगपूर्ण व्यवहार और रिश्तों में अस्थिरता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. लेकिन, सिर्फ गुस्सा, मूड स्विंग या मोबाइल की लत को BPD नहीं कहा जा सकता है. इसका diagnosis मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बातचीत, लक्षणों की हिस्ट्री और व्यक्ति की परिस्थितियों को समझने के बाद करते हैं. बच्चों में BPD को लेकर क्यों बरतनी चाहिए सावधानी? बच्चों और किशोरों में भावनात्मक उतार-चढ़ाव विकास का हिस्सा भी हो सकते हैं. NIMH के अनुसार, BPD का diagnosis आमतौर पर late adolescence या early adulthood में किया जाता है. 18 साल से कम उम्र में diagnosis कभी-कभी किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए लक्षण गंभीर और कम से कम एक साल तक बने रहना जरूरी है. इसलिए कक्षा 4 के किसी बच्चे में अचानक आपत्तिजनक व्यवहार दिखाई देने पर माता-पिता को खुद से यह तय नहीं करना चाहिए कि उसे BPD है. BPD के प्रमुख लक्षण क्या हो सकते हैं? मूड में बहुत तेज और बार-बार बदलाव भावनाओं को नियंत्रित करने में परेशानी बहुत ज्यादा गुस्सा या गुस्से पर नियंत्रण में कठिनाई खुद को लेकर अस्थिर या बदलती हुई धारणा रिश्तों में अत्यधिक नजदीकी और फिर अचानक दूरी छोड़े जाने या ठुकराए जाने का गहरा डर आवेगपूर्ण या जोखिम भरा व्यवहार लंबे समय तक खालीपन महसूस होना कुछ मामलों में self-harm या आत्महत्या से जुड़े विचार बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो क्या करें? डॉक्टर कहते हैं कि, अगर बच्चा कई हफ्तों या महीनों से लगातार चिड़चिड़ा है, स्कूल और परिवार में उसका व्यवहार बदल गया है, वह अलग-थलग रहने लगा है या उसका व्यवहार खुद अथवा किसी दूसरे के लिए अनसेफ हो गया है, तो इसे केवल ‘बदतमीजी’ या ‘उम्र का असर’ मानकर नजरअंदाज न करें. डॉक्टर ऐसे लगातार बने रहने वाले और रोजमर्रा की जिंदगी में हस्तक्षेप करने वाले बदलावों पर professional evaluation की सलाह देते हैं. साथ ही, बच्चे के इंटरनेट और मोबाइल इस्तेमाल पर उम्र के अनुरूप निगरानी, स्पष्ट boundaries और खुली बातचीत जरूरी है. यदि बच्चा किसी दूसरे बच्चे या परिवार के सदस्य के साथ यौन व्यवहार कर रहा है, तो सबसे पहले दोनों बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और तुरंत बाल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें.
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