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बंदूक छोड़ आत्मसम्मान का रास्ता: नक्सलवाद से मुख्यधारा तक लौट रही जिंदगी, पुनर्वास से मिल रहा नया भविष्य
बंदूक छोड़कर आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को यदि शिक्षा, कौशल, रोजगार और सामाजिक स्वीकार्यता का अवसर मिलता है, तो यह बदलाव लंबे समय तक कायम रह सकता है। सुकमा और बस्तर से सामने आ रही ऐसी कहानियां इस बात का संकेत हैं कि हिंसा के अंधेरे से निकलकर विकास, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की ओर बढ़ने का रास्ता खुल रहा है। The post बंदूक छोड़ आत्मसम्मान का रास्ता: नक्सलवाद से मुख्यधारा तक लौट रही जिंदगी, पुनर्वास से मिल रहा नया भविष्य appeared first on See Positive .
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