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बाइक नहीं मिली तो कर दी बहू की हत्या:सबूत के अभाव में पति सहित 7 ससुराली बरी, आगरा कोर्ट में 8 साल से चल रहा था केस
शमशाबाद में बुलेट बाइक की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की गला घोंटकर हत्या करने और सबूत मिटाने के लिए जल्दबाजी में उसका अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया गया था। मृतका के पिता की शिकायत पर पति, सास-ससुर, दो जेठ और दो जिठानियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। एडीजे-5 विराट कुमार श्रीवास्तव ने साक्ष्य के अभाव में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। मामले के अनुसार, रजनी की शादी 6 मार्च 2018 को अनिल से हुई थी। उसके पिता रामजी लाल का आरोप था कि शादी के बाद ससुराल पक्ष बुलेट मोटरसाइकिल की मांग को लेकर बेटी को परेशान करता था। आरोप है कि 30 दिसंबर 2018 को मांग पूरी न होने पर रजनी की गला घोंटकर हत्या कर दी गई और पुलिस को सूचना दिए बिना जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों के ससुराल पहुंचने तक उन्हें शव नहीं मिला और केवल राख मिली थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष हत्या की सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर तक अदालत में नहीं बता सका। मृतका के भाई, चाचा और फूफा को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से भी अभियोजन के कथन की पुष्टि नहीं हो सकी। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए दावा किया कि रजनी घटना से करीब आठ दिन पहले से अपने मायके में रह रही थी और उसकी मृत्यु वहीं हुई थी। अधिवक्ता नीरज पाठक ने यह भी तर्क दिया कि आरोपियों के गांव में हुई दूसरी महिला की मृत्यु की राख को रजनी का शव बताकर मुकदमा दर्ज कराया गया। इन दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
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