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भोपाल में दो कश्मीरी छात्रों को धमकी:बोले- कश्मीरी मुस्लिम हैं इसलिए जबरन खाली करा रहे पीजी; जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने सीएम से मांगी मदद
भोपाल में फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे दो कश्मीरी छात्रों ने कॉलोनी के लोगों पर परेशान करने, धमकाने और पीजी खाली कराने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर से होने और मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने पुलिस और जिला प्रशासन से आरोपों की मौके पर जांच, छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देने की मांग की है। हॉस्टल नहीं मिला, पिछले साल से पीजी में रह रहे हैं मामला भोपाल स्थिति गांधी नगर की शांति होम्स कॉलोनी का है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने 18 अगस्त को मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि दोनों छात्र भोपाल के TRUBA इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों का चयन प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम (PMSSS) से हुआ था। एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहेमी ने बताय कि योजना के तहत दोनों छात्रों को हॉस्टल की सुविधा मिलनी थी, लेकिन कॉलेज में उनके लिए हॉस्टल उपलब्ध नहीं है। इसलिए दोनों पिछले साल से पीजी में रह रहे हैं। अब छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलोनी के कुछ सदस्य और अन्य लोग उनके मकान मालिक पर उन्हें वहां से निकालने का दबाव बना रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और मुस्लिम होना है विरोध की वजह एसोसिएशन का कहना है कि छात्रों ने बताया है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे जम्मू-कश्मीर से हैं और मुस्लिम हैं। आरोप है कि मकान मालिक को चेतावनी दी गई कि अगर छात्रों को वहां से नहीं हटाया गया तो संबंधित लोग जबरन परिसर में घुसकर उन्हें बाहर निकाल सकते हैं। पत्र में इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा गया है कि मामले की तुरंत जांच जरूरी है। एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि छात्रों की क्षेत्रीय या धार्मिक पहचान उनके सुरक्षित तरीके से रहने और पढ़ने में बाधा नहीं बननी चाहिए। दोनों भारतीय नागरिक हैं और उन्हें अन्य छात्रों की तरह सुरक्षा और सम्मान के साथ शिक्षा हासिल करने का अधिकार है। डर इतना कि कॉलेज जाना भी मुश्किल एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहेमी के अनुसार, दोनों छात्रों ने बताया है कि डर की वजह से वे अपने कमरे से सामान्य तरीके से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। यात्रा करने और कॉलेज जाने में भी उन्हें परेशानी हो रही है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को बताया कि जब कोई छात्र अपने घर से बाहर निकलने और कॉलेज जाने को लेकर ही डरा हुआ हो, तो उसके लिए सामान्य माहौल में पढ़ाई जारी रखना मुश्किल है। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन से भी मदद और हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन एसोसिएशन के मुताबिक उन्हें उनकी तत्काल सुरक्षा और रहने की समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त मदद नहीं मिली। एसोसिएशन ने कहा- इसे सिर्फ मकान का विवाद न माना जाए जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से कहा है कि मामले को केवल मकान या पीजी से जुड़ा विवाद मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उसके मुताबिक इसमें छात्रों की सुरक्षा, धमकी, दबाव और कथित भेदभाव का मामला भी शामिल है। एसोसिएशन ने मांग की है कि भोपाल पुलिस और जिला प्रशासन छात्रों से सीधे बात करे, मौके पर जाकर आरोपों की स्वतंत्र जांच करे और अगर कोई व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक छात्रों को दबाव या धमकी के जरिए पीजी खाली करने के लिए मजबूर नहीं किया जाए। कॉलेज के पास सुरक्षित आवास की मांग पत्र में कहा गया है कि चूंकि कॉलेज में छात्रों के लिए हॉस्टल उपलब्ध नहीं है, इसलिए जिला प्रशासन और कॉलेज मिलकर उनके लिए संस्थान के पास सुरक्षित आवास की व्यवस्था कराने में मदद करें। एसोसिएशन का कहना है कि इससे दोनों छात्र बिना डर के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। साथ ही कॉलेज प्रशासन से छात्रों की उपस्थिति, परीक्षा, पढ़ाई और PMSSS से मिलने वाले स्कॉलरशिप लाभ पर किसी तरह का प्रतिकूल असर नहीं पड़ने देने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से तत्काल दखल देने की मांग की एसोसिएशन ने कहा है कि मध्यप्रदेश में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे में राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर छात्र को सुरक्षित और शांत माहौल मिले। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर से बाहर पढ़ने आए छात्रों के लिए घर से दूर रहना पहले ही चुनौतीपूर्ण होता है। पत्र में कहा गया है कि दोनों छात्रों ने फार्मेसी की पढ़ाई में समय और मेहनत लगाई है। यदि डर के कारण उनकी उपस्थिति और पढ़ाई लंबे समय तक प्रभावित होती है तो इसका असर उनके शैक्षणिक वर्ष और कॅरियर पर पड़ सकता है।
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