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अमेठी में रिटायर्ड फौजी और भाई को उम्रकैद:अयोध्या बक्श हत्याकांड में कोर्ट ने 1.54 लाख रुपए का लगाया जुर्माना, 16 साल बाद फैसला
अमेठी में अयोध्या बक्श सिंह हत्याकांड में जिला जज सुनील कुमार ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने रिटायर्ड हवलदार गिरीश कुमार पांडेय और उसके भाई सतीश पांडेय को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर कुल 1.54 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। तीसरे आरोपी विनीत पांडेय की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। कोर्ट 16 साल बाद फैसला सुनाया। जमीन जोतने के विरोध पर गोली मारने का आरोप डीजीसी क्रिमिनल पवन कुमार दुबे ने बताया कि मुंशीगंज थाना क्षेत्र के पूरे दुर्गा पट्टी टंडवा निवासी अयोध्या बक्श सिंह का पड़ोसी गांव रघुनाथपुर डिहवा निवासी गिरीश कुमार पांडेय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि 30 जुलाई 2010 को गिरीश कुमार पांडेय, सतीश पांडेय और विनीत पांडेय अयोध्या बक्श सिंह की करीब 5 बिस्वा आबादी की जमीन को ट्रैक्टर से जोतकर खेत में मिलाने लगे। अयोध्या बक्श सिंह ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने गोली चला दी। गोली लगने से उनकी मौत हो गई। बीच-बचाव करने पहुंचे उनके बेटे मान सिंह को भी रायफल की बट और लाठी से पीटकर घायल करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, घटना में इस्तेमाल लाइसेंसी रायफल गिरीश कुमार पांडेय की थी। घटना के समय वह सेना में हवलदार था। बेटे की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा घटना के बाद मृतक के बेटे जितेंद्र सिंह ने गिरीश कुमार पांडेय, सतीश पांडेय और विनीत पांडेय के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। डीजीसी क्रिमिनल पवन कुमार दुबे और वादी पक्ष के अधिवक्ता नीरज श्रीवास्तव के मुताबिक, जितेंद्र सिंह समेत आठ गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित किए। बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों के पक्ष में चार गवाह पेश किए गए, लेकिन कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। जुर्माने की रकम में मृतक के परिवार और घायल को हिस्सा कोर्ट ने दोनों दोषियों पर कुल 1.54 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसमें से 75 हजार रुपए मृतक अयोध्या बक्श सिंह की पत्नी को और 25 हजार रुपए घायल मान सिंह को दिए जाएंगे। जिला जज ने बुधवार को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था और उन्हें जेल भेज दिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने सजा की अवधि और जुर्माने का फैसला सुनाया। घटना से पहले दोनों पक्षों में चल रहा था जमीन का मुकदमा वादी पक्ष के अधिवक्ता नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि घटना से पहले दोनों पक्षों के बीच गौरीगंज तहसील में हदबरारी का मुकदमा चल रहा था। आरोपी गिरीश कुमार पांडेय के पक्ष की ओर से जमीन की पैमाइश का मुकदमा दायर किया गया था, जबकि मृतक पक्ष ने नक्शा दुरुस्ती का मामला दाखिल किया था। इसके बावजूद जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ और 30 जुलाई 2010 को अयोध्या बक्श सिंह की हत्या कर दी गई। 18 साल की उम्र में पिता को खोया, 16 साल बाद मिला न्याय फैसले के बाद अयोध्या बक्श सिंह के बड़े बेटे मान सिंह ने संतुष्टि जताई। उन्होंने कहा कि उनके पिता को न्याय मिला है। उन्होंने बताया कि घटना के समय वह तीन भाइयों और पांच बहनों में सबसे बड़े थे और उनकी उम्र 18 साल थी। घटना में घायल होने के बाद वह बेहोश हो गए थे, इसलिए उनके छोटे भाई जितेंद्र ने मुकदमा दर्ज कराया था। मान सिंह के मुताबिक, गिरीश कुमार पांडेय सेना में हवलदार था और कानपुर में तैनात था। वह धान की फसल लगाने के समय छुट्टी पर गांव आता था और जमीन को लेकर विवाद करता था। उन्होंने कहा कि 16 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट के फैसले से उनके परिवार को न्याय मिला है।
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