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आजमगढ़ में बोले सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान:देश के बंटवारे के दर्द को कभी नहीं बुलाया जा सकता
हर घर तिरंगा कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वाधीनता दिवस के पूर्व दिवस 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हरिऔध कला केन्द्र में‘‘ अभिलेख, चित्र प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी’ का शुभारम्भ कारागार मंत्री, दारा सिंह चौहान, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल द्वारा किया गया। डाक्यूमेंटरी मूवी के माध्यम से विभाजन की मानवीय त्रासदी का प्रसारण किया गया। विस्थापित परिवार के सदस्यों द्वारा अनुभव व वृतांत को सुना गया एवं उनके साथ त्रासदी के दौरान प्रार्णाेत्सर्ग करने वाले लोगों की याद में 2 मिनट की मौन श्रद्धाजलि दी गयी। विभाजन विभीषिका दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में मंत्री दारा सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाते हुए बताया कि ‘‘देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाईयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान के याद में 14 अगस्त को ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ के तौर पर मनाया जा रहा है। विभाजन विभीषिका इतनी भयावह थी और इतने लंबे काल तक चली कि दशकों बाद तक लोग पाकिस्तान और बाग्लादेश से बड़ी संख्या में पलायन करते रहे। इस समय बंगाल का भी विभाजन हुआ। इसमें बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया था जो सन् 1971 में बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। मजहब के नाम पर हुआ देश का बंटवारा मजहब के नाम पर हुआ देश ब विभाजन की विभीषिका ने करोड़ों को उजाड़ा। उन्होंने कहा कि शरणार्थी बनने को मजबूर हुए करोड़ों लोग अपने घर-बार को छोड़कर पैदल ही चल दिए। गांव के गों उजड़ते गए, वे काफिलों में बदलते गये और यह काफिला मीलों तक पसरा रहा। डीएम रविंद्र कुमार ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की दर्दनाक कहानी है। यह एक ऐसी कहानी है जिसमें लाखों लोग अजनबियों के बीच एकदम वितरित वातावरण में नया आशियाना तालाश रहे थे। विश्वास व धार्मिक आधार पर एक हिंसक विभाजन की कहानी होने के अतिरिक्त यह एक बात की भी कहानी है, कैसे एक जीवन शैली एक वर्षाे पुराने सह-अस्तिव का युग अचानक और नाटकी रूप से समाप्त हो गया। लगभग 60 लाख गैर मुस्लमान उस क्षेत्र से निकल आए, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बन गया। 65 लाख मुसलमान पंजाब, दिल्ली, आदि के भारतीय हिस्सों से पश्चिमी पाकिस्तान चके गये थे। 20 लाख गैर मुसलमान पूर्वी बंगाल, जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान बना, से निकल कर पश्चिम बंगाल आए, 1950 में 20 लाख और गैर मुस्लमान पश्चिम बंगाल आए। 10 लाख मुसलमान पश्चिम बंगाल से पूर्वी पाकिस्तान चले गये। इस विभीषिका में मारे गये लोगों का आकड़ा 5 लाख बताया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिकारी और सामाजिक संगठनों के लोग भी उपस्थित रहे।
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