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आज का एक्सप्लेनर:सुरेंद्र कोली ने रिहा होने के 309वें दिन फांसी क्यों लगा ली; 18 साल जेल में रहा, बच्चों की लाशें खाने तक के आरोप थे
12 नवंबर 2025 की शाम, ग्रेटर नोएडा की लुकसर जेल से सुरेंद्र कोली बाहर निकला। निठारी कांड में 19 बच्चों के रेप-मर्डर के आरोप में 18 साल से जेल काटने के बाद कोली को सुप्रीम कोर्ट ने दुर्लभ फैसले में बरी कर दिया था। 18 सितंबर 2026, हरिद्वार का भूपतवाला इलाका। सुरेंद्र कोली का शव पड़ा है। उसने कथित रूप से अपनी दुकान में फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने बताया कि कोहली के गले में फांसी का फंदा था। आशंका है कि वजन के चलते पतली रस्सी टूट गई थी। आखिर जेल से बाहर 10 महीनों में ऐसा क्या हुआ कि सुरेंद्र कोली ने जान दे दी, क्या था निठारी कांड, जिसमें 3 बार कोली को फांसी की सजा सुनाई गई थी और तब वो कैसे बचा था; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: रिहाई के बाद से अब तक सुरेंद्र कोली क्या कर रहा था? जवाबः सुरेंद्र मूल रूप से उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले के मंगरुखाल गांव का रहने वाला था। निठारी कांड में बच्चों के रेप-मर्डर के आरोपों से बरी होने के बाद उत्तराखंड चला गया था... सवाल-2: 18 साल बाद रिहा हुए कोली ने आत्महत्या क्यों की होगी? जवाब: कोली जिन हालात से गुजर रहा था, उनमें आत्महत्या की आशंका मजबूत होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोली की आत्महत्या के पीछे 4 मेंटल और साइकोलॉजिकल वजहें हो सकती हैं... 1. जेल के बाद भी कैद का असर 2. मौत के साए में गुजरे सालों का ट्रॉमा 3. अपमान से उपजी जीने की अनिच्छा 4. पैसा-परिवार सब छूटने का असर पुलिस के मुताबिक, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए हैं। पुलिस फिलहाल आत्महत्या का मामला मानकर चल रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मौत पर संदेह भी जताया है। सवाल-3: निठारी कांड क्या है और कोली पर क्या आरोप थे? जवाब: गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा के सेक्टर 31 में एक गांव है- निठारी। जहां 2005 में ये पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ। पुलिस की जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक... कोली को 3 अलग-अलग कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई... सवाल-4: तीन बार फांसी की सजा, फिर कैसे बरी हुआ था सुरेंद्र कोली? जवाब: इसको 2 हिस्सों में समझिए... 1. रिम्पा की हत्या का मामला 2. बाकी 12 मामले वहीं रिम्पा की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट की रोक थी, लेकिन अंतिम फैसला नहीं आया था। कोली ने क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी, इस पर सुनवाई करते हुए 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे रिम्पा की हत्या के मामले में बरी कर दिया और तुरंत रिहाई के आदेश दिए। क्यूरेटिव याचिका अदालत से राहत पाने का आखिरी कानूनी उपाय होता है। यह सिर्फ दुर्लभ और अपवाद वाले मामलों में स्वीकार की जाती है। इसका इस्तेमाल जज तभी करते हैं, जब किसी मामले में कोर्ट की समीक्षा किसी बड़ी गलती को ठीक करने में फेल रही हो। याचिका में कोली के वकील का तर्क था कि रिम्पा की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोली के बयान और कथित खुलासों के आधार पर उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी है। जबकि इन्हीं सबूतों और बयानों को खारिज करते हुए बाकी 12 मामलों में हाई कोर्ट ने कोली को बरी किया है। 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसके आदेश पर मोहर लगाई। ऐसे में एक जैसे सबूतों बयानों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के 2011 और 2025 के दो विपरीत फैसले एक साथ टिक सकते हैं? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के पीछे दिए तर्कों को मान लिया। सवाल-5: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोली को बरी करने के पीछे क्या तर्क दिए थे? जवाब: 3 प्रमुख तर्क थे... 1. पुलिस की जांच ठीक से नहीं हुई 2. कोली के कबूलनामे पर सवाल 3. ऑर्गन ट्रेड का एंगल सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम कोली के बयान को भरोसेमंद नहीं मान सकते, जबकि दूसरे सभी मामलों में उसे खारिज कर दिया गया है। जिन सबूतों को कोर्ट खारिज कर चुका है, उनके आधार पर कोली को दोषी ठहराना संविधान के आर्टिकल 21 और 14 के खिलाफ है।’ ----------------- ये खबर भी पढ़िए... दोस्त से मिलने गई लड़की, उसने 3 और दोस्तों को बुलाकर रेप-मर्डर किया; POCSO के 97% रेप मामलों में आरोपी जानने वाले ही क्यों 13 सितंबर 2026, सुबह का वक्त। दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में सड़क से सटे खेत में कुछ कुत्ते दिखे। ये एक लड़की की पुरानी हो चुकी लाश नोच रहे थे। एक हाथ शरीर से अलग कुछ दूर पड़ा था। शरीर पर चाकू घोंपने के निशान थे। पुलिस ने जांच शुरू की। 3 दिन बाद 4 लड़कों को गिरफ्तार किया है। इनमें 3 आरोपी नाबालिग हैं। एक तो लड़की का जानने वाला था। पूरी खबर पढ़िए...
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