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8 रुपए के लिए 9 लाख का खाता फ्रीज:आयोग के निर्देश पर ICICI बैंक ने किया चालू, उपभोक्ता आयोग बोला- गलती बैंक की
जैसलमेर उपभोक्ता आयोग ने एक बड़े मामले में उपभोक्ता को राहत देते हुए बैंक को झटका दिया है। आयोग ने साफ कहा है कि बैंक किसी भी अनजान या संदिग्ध लेनदेन की आड़ में ग्राहक का पूरा खाता बंद नहीं कर सकता है। जैसलमेर के मोहित वासू का ICICI बैंक में खाता है। मार्च 2026 में चार अनजान लोगों ने मोहित के खाते में 1-1 रुपए करके 8 बार कुल 8 रुपए जमा कराए थे। महाराष्ट्र की साइबर पुलिस से मिले एक ई-मेल के आधार पर बैंक ने मोहित का पूरा खाता फ्रीज कर दिया। जिसमें 9 लाख रुपए जमा थे। छात्र मोहित पढ़ाई की फीस तक नहीं दे पा रहा था। परेशान होकर उसने आयोग का दरवाजा खटखटाया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी पवन कुमार ओझा एवं सदस्य रमेश कुमार गौड ने 1 महीने में सुनवाई पूरी कर बैंक को निर्देश दिया कि वह सिर्फ 8 रुपए की सीमा तक ही रोक लगाए और बाकी 9 लाख रुपए का खाता तुरंत चालू करे। पढ़ाई की फीस रोकने पर दर्ज कराया केस परिवादी मोहित वासू सीए इंटर की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें कॉलेज, हॉस्टल और ट्यूशन की फीस जमा करनी थी। 16 से 28 मार्च के बीच उनके खाते में 8 रुपए अनजान यूपीआई से आए थे। बैंक ने बिना किसी मजिस्ट्रेट के आदेश के पूरा खाता बंद कर दिया। आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गौड़ ने मामले की गंभीरता को देखा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों के अनुसार बिना कोर्ट या मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश के बैंक किसी का खाता पूरी तरह बंद नहीं रख सकता। एक महीने में न्याय मिला, बैंक ने बात मानी परिवादी मोहित ने 8 जुलाई को आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग ने कार्रवाई करते हुए 14 अगस्त को यानी सिर्फ 1 महीने में फैसला सुना दिया। फैसला आते ही ICICI बैंक ने अपनी गलती मानी और मोहित का खाता तुरंत चालू कर दिया। अब सिर्फ 8 रुपए की राशि पर रोक रखी गई है और बाकी 9 लाख रुपए मोहित इस्तेमाल कर पा रहे हैं। बैंक को पूरी रकम रोकने का अधिकार नहीं आयोग ने स्पष्ट किया कि पुलिस या साइबर सेल की चिट्ठी मिलने पर भी बैंक को पूरी रकम रोकने का अधिकार नहीं है। जितने रुपए का विवाद है, सिर्फ उतनी ही रकम रोकी जा सकती है। इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अक्सर साइबर फ्रॉड की जांच के नाम पर लोगों के पूरे बैंक खाते बंद कर दिए जाते हैं।
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