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168 ईसीसीई एजुकेटरों का प्रशिक्षण संपन्न:'जादुई पिटारे' से होगी पढ़ाई; बच्चों के मन से दूर होगा स्कूल का डर
सिद्धार्थनगर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बांसी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत जिले के 168 ईसीसीई (ECCE) एजुकेटरों का दो बैचों में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। इस ट्रेनिंग में एजुकेटरों को बालवाटिका के प्रभावी संचालन और बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा से जोड़ने के गुर सिखाए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर डायट के उप प्राचार्य लालजी पांडेय ने कहा कि आदर्श बालवाटिका बच्चों की पहली पाठशाला होती है। यहीं से बच्चे औपचारिक विद्यालयी शिक्षा की ओर कदम बढ़ाते हैं। बालवाटिका का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना और उनका सर्वांगीण विकास करना है। वहीं, डीसी निपुण आशीष सिंह ने कहा कि इस ट्रेनिंग में सीखी गई गतिविधियों का उपयोग कर बच्चों के मन से स्कूल जाने का डर दूर किया जा सकता है, जिससे उनमें सीखने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास जगेगा। जादुई पिटारा और वंडर बॉक्स का प्रभावी उपयोग प्रशिक्षण के दौरान डायट प्रवक्ता डॉ. प्रतिभा सिंह ने पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की अवधारणा और बालवाटिका को लेकर प्रदेश सरकार के विजन पर विस्तार से चर्चा की। नोडल एआरपी उत्कर्ष श्रीवास्तव ने क्रियाशील बालवाटिका की अवधारणा के साथ-साथ 'जादुई पिटारा' और 'वंडर बॉक्स' के प्रभावी उपयोग की तकनीकी जानकारी दी। इसके अलावा नोडल एसआरजी अपूर्व श्रीवास्तव ने ईसीसीई एजुकेटरों के कार्य, दायित्वों और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डायट प्रवक्ता अनिल मिश्रा, रामचंद्र मौर्य, श्याम प्रताप सिंह, बद्रीनारायण सहित एजुकेटर अंजली, पिंकी वर्मा, सौम्या, ज्योति, श्वेता, अर्चना, प्रिया, निशा और क्षमा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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