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US-Iran Tension के बीच Crude Oil की कीमतों में भारी उछाल, $92 के पार पहुंचा Brent Crude का भाव

📰 Prabhasakshi 🕐 1 min read 📅 September 1, 2026 👁 4 views
US-Iran Tension के बीच Crude Oil की कीमतों में भारी उछाल, $92 के पार पहुंचा Brent Crude का भाव
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है। मंगलवार को तेल के दाम दो प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुई सैन्य झड़पों के बाद तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। निवेशकों को डर है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा भाव 2.17 डॉलर यानी करीब 2.4 प्रतिशत बढ़कर 92.66 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल में 2.48 डॉलर यानी 2.89 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और इसकी कीमत 88.24 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इस तेजी के साथ दोनों प्रमुख तेल अनुबंध पिछले सप्ताह हुई अधिकांश गिरावट की भरपाई कर चुके हैं। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच जुलाई के आखिर के बाद पहली बार सीधे हमले फिर शुरू हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ आगे भी हमले किए जाने की चेतावनी दी थी। इससे पहले दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव धीरे-धीरे आर्थिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा था, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने फिर से संघर्ष बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। पीवीएम के विश्लेषक जॉन इवांस के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के खिलाफ किए जा रहे मिसाइल हमलों से यह संकेत मिल रहा है कि मौजूदा संघर्ष जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिका जून में हुए अस्थायी शांति समझौते में किए गए दायित्वों पर वापस लौटता है तो ईरान भी तत्काल जवाबी कदम उठाएगा। इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं हिस्से की कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती थी। कतर और ओमान जैसे देश इस जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इन प्रयासों से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच ताजा संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होने की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि बाजार में खरीदारी का दबाव अभी बहुत मजबूत नहीं है। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि कारोबारी फिलहाल आपूर्ति में पहले से ज्यादा बड़ी बाधा की संभावना को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। सोमवार को दो बड़े तेल टैंकरों पर भी संदिग्ध प्रक्षेप्य आकर लगे थे। दोनों जहाज सऊदी अरब का तेल लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे। जहाजों की निगरानी करने वाली संस्था केप्लर के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को इस मार्ग से दिखाई देने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या करीब पांच प्रतिदिन रही, जबकि दस दिनों का औसत लगभग 14 जहाज प्रतिदिन था। इन पांच जहाजों में कोई भी तेल टैंकर नहीं था। कॉमर्जबैंक के विश्लेषकों के अनुसार पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द दोबारा खोलने की उम्मीद बनी थी, लेकिन ताजा संघर्ष ने उन उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। अब सवाल यह है कि तनाव और बढ़ने की स्थिति में इस रास्ते से सीमित स्तर पर चल रही जहाजों की आवाजाही भी कितनी सुरक्षित रह पाएगी। रॉयटर्स के लिए अगस्त में किए गए विश्लेषकों के सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था कि 2026 में तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती है। इसकी प्रमुख वजह समुद्री परिवहन में जारी व्यवधान बताए गए थे। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति आने वाले समय में वैश्विक तेल कीमतों की दिशा तय करने वाले सबसे अहम कारकों में शामिल हैं।
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