education
उपाधि और प्रतियोगी परीक्षाएं
लेखक : प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश आज भारत में शिक्षा, रोजगार और करियर निर्माण की पूरी प्रक्रिया अत्यंत प्रतिस्पर्धी हो चुकी है। चाहे शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का प्रश्न हो या सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में रोजगार का, हर स्तर पर परीक्षाएं और उनकी मूल्यांकन पद्धतियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब पारंपरिक अकादमिक शिक्षा और प्रतियोगी चयन प्रक्रियाओं का अंतिम उद्देश्य व्यक्ति की योग्यता और क्षमता का आकलन करना ही है, तो उनके पाठ्यक्रम, परीक्षा-पद्धति और मूल्यांकन मानकों में इतना व्यापक अंतर क्यों? 10+2 के बाद विद्यार्थियों को चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कृषि, ...
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