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देवनागरी का लोप, अस्तित्व के लिए चुनौती
संदेश भेजने की सुविधा देवनागरी में भी उपलब्ध है, फिर भी नई पीढ़ी तेजी से हिंदी को अंग्रेजी वर्णमाला में लिखने लगी है। इसका एक कारण देवनागरी में मात्राएं लगाने में लगने वाला समय भी बताया जाता है। सुविधा के लिए आरंभ हुआ यह परिवर्तन कहीं हमारी लिपि के अस्तित्व के लिए चुनौती न बन जाए, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। आज अनेक लोग हिंदी बोलते हैं, पर उसे देवनागरी में लिखने का अभ्यास लगातार कम होता जा रहा है। मोबाइल पर बार-बार लिपि बदलना भी लोगों को असुविधाजनक लगता है। परिणामस्वरूप हिंदी शब्दों को अंग्रेजी वर्णमाला में लिखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
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