politics
थाने बन गए अदालत, अदालत में व्याप्त है गतिरोध
लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय केवल अदालत की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता , बल्कि उसकी पहली सीढ़ी आम नागरिक का पुलिस थाने तक पहुंचना है। थाना नागरिक की शिकायत सुनने , कानून के अनुसार कार्रवाई करने और पीड़ित को सुरक्षा देने की संस्था है , जबकि दोष और निर्दोष का अंतिम निर्धारण न्यायालय का अधिकार है। लेकिन जब पुलिस थाने ही आरोप , पूछताछ , दबाव और निर्णय के केंद्र बनने लगें और दूसरी ओर अदालतों में मुकदमों का अंबार बढ़ता जाए , तो यह स्थिति न्याय व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है। आज आम आदमी की सबसे ...
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