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दमोह में 35 करोड़ के भवन में निर्माण खामियां मिलीं:कलेक्टर ने सांदीपनि स्कूल निर्माण में खामियां पकड़ीं; लैब में ताला देख भड़कें
दमोह के हटा में शुक्रवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालय का निरीक्षण किया। 35 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे भवन में उन्हें निर्माण कार्य में कई कमियां मिलीं। कलेक्टर ने दीवार की खुदाई करवाकर रेत की गुणवत्ता की जांच कराई और अधिकारियों को काम सुधारने के निर्देश दिए। बोतल में पानी डालकर रेत की जांच कराई कलेक्टर ने अपनी मौजूदगी में दीवार के प्लास्टर की खुदाई करवाई। इसके बाद रेत की गुणवत्ता जांचने के लिए कर्मचारियों से बोतल में रेत और पानी मिलवाया गया। जांच में रेत में मिट्टी की मात्रा ज्यादा मिली। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। निर्माण स्थल की लैब में मिला ताला कलेक्टर ने निर्माण स्थल पर बनी प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया। लैब में ताला लगा मिला। उन्होंने सवाल किया कि सामग्री की लैब टेस्टिंग नहीं होने पर निर्माण की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित होगी। उन्होंने अधिकारियों को लैब को नियमानुसार संचालित करने और निर्माण सामग्री की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। टाइल्स और प्लेटफार्म का काम भी देखा कलेक्टर ने भवन में टाइल्स, प्लेटफार्म, फर्श और रेलिंग समेत अन्य कामों की भी जांच की। निरीक्षण में कुछ कामों की गुणवत्ता में कमी मिली। इस दौरान पीआईयू के कार्यपालन यंत्री रामानुज विश्वकर्मा और उपयंत्री किशन पीपरे को कलेक्टर की नाराजगी का सामना करना पड़ा। कंसल्टेंसी के उपयंत्री से भी निर्माण की जानकारी ली गई, लेकिन वे मौके पर पूरी जानकारी नहीं दे पाए। निर्माण की रफ्तार धीमी, स्थायी सब इंजीनियर की व्यवस्था के निर्देश कलेक्टर ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय बच्चों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने भवन की नियमित निगरानी के लिए स्थायी रूप से एक सब इंजीनियर की व्यवस्था करने को कहा। निरीक्षण के दौरान कलेक्ट्रेट रेट से कम मजदूरी दिए जाने की बात भी सामने आई, जिस पर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। विद्यालय भवन का निर्माण 2023 में शुरू हुआ था और 2025 में कक्षाएं शुरू होना प्रस्तावित था। एक शिक्षण सत्र बीतने के बाद भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हुआ है।
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