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Subhash Chandra: CBI केस से SEBI के बैन तक, कौन हैं सुभाष चंद्रा, कब-कब कानूनी और वित्तीय संकट में घिरे Zee के फाउंडर?
Subhash Chandra Case: ‘फादर ऑफ इंडियन टेलीविजन’ के नाम से पहचाने जाने वाले एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा इन दिनों लगातार कानूनी और वित्तीय विवादों के कारण चर्चा में हैं. शनिवार 5 सिंतबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ करीब 1,322 करोड़ रुपये के LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) मामले में FIR दर्ज की है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चंद्रा पहले से ही व्यक्तिगत दिवालियापन, कर्ज और SEBI की कार्रवाई से जुड़े मामलों का सामना कर रहे हैं. लेकिन सुभाष चंद्रा से जुड़े विवादों की कहानी सिर्फ आज के CBI केस से शुरू नहीं होती. पिछले कई सालों में उनके कारोबारी समूह से जुड़े कर्ज, कंपनी की संपत्तियों के इस्तेमाल, कथित फंड डायवर्जन और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर कई नियामक और न्यायिक कार्यवाही हुई हैं. 1,322 करोड़ रुपये का नया CBI केस 5 सितंबर 2026 को CBI ने सुभाष चंद्रा, पंकज सुरोलिया, अमीश पांड्या और राजीव ढोलकिया के खिलाफ LIC Housing Finance Ltd की शिकायत पर मामला दर्ज किया. शिकायत का संबंध दो लोन सुविधाओं से है, जिनकी मूल स्वीकृत राशि करीब 980 करोड़ रुपये थी. आरोप है कि 2018 में लोन हासिल करने के दौरान चंद्रा की नेट वर्थ से जुड़े दस्तावेज में बहुत ऊंचे आंकड़े बताए गए. एक दस्तावेज में उनकी नेट वर्थ करीब 59,000 करोड़ रुपये और दूसरे में करीब 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी. बाद में व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही के दौरान 2024 में उनकी घोषित नेट वर्थ करीब 31.79 करोड़ रुपये हो गया. इन आरोपों की CBI अब जांच कर रही है. अभी अदालत ने इन आरोपों को साबित नहीं किया है. 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के दावों वाला व्यक्तिगत दिवालियापन मामला सुभाष चंद्रा के खिलाफ सबसे बड़ा मौजूदा कानूनी लड़ाई व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही का है. यह मामला इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें चंद्रा को एक एस्सेल ग्रुप से जुड़ी कंपनी के लोन का पर्सनल गारंटर बताया गया. NCLT के रिकॉर्ड के मुताबिक, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने 2022 में दिवाला और दिवालियापन संहिता की Section 95 के तहत कार्रवाई शुरू करने की मांग की थी. संबंधित लोन में विवेक इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को 170 करोड़ रुपये की सुविधा दी गई थी और डिफॉल्ट फरवरी 2019 में हुआ था. अप्रैल 2024 में NCLT ने चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत गारंटर दिवालियापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया. इसके बाद पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी. इस फैसले का LIC हाउसिंग फाइनेंस, HDFC बैंक और दूसरे क्रेडिटर्स ने विरोध किया. बाद में 1 सितंबर 2026 को NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने उस अप्रूवल पर रोक लगाकर मामले की दोबारा सुनवाई का आदेश दिया और चंद्रा को अपनी संपत्तियां ट्रांसफर/डिस्पोज करने से रोका. SEBI का ZEE एंटरटेनमेंट फंड डायवर्जन मामला सुभाष चंद्रा से जुड़ा एक बड़ा रेगुलेटरी मामला ZEE एंटरटेनमेंट Ltd यानी ZEEL की संपत्तियों और प्रमोटर-लिंक्ड इकाइयां को लेकर रहा है. SEBI की 2023 की अंतरिम कार्यवाही के मुताबिक, चंद्रा ने सितंबर 2018 में यस बैंक के लिए एक लेटर ऑफ कम्फर्ट दिया था. इसमें यह आश्वासन था कि 200 करोड़ रुपये की फिक्सड डिपॉसिट उपलब्ध रहेगी और डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक उसे लोन रिपेमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकता है. SEBI के मुताबिक, इस लेटर ऑफ कम्फॉर्ट के लिए ZEEL के बॉर्ड की मंजूरी नहीं ली गई थी. बाद में यस बैंक ने ZEEL की 200 करोड़ रुपये की FD का इस्तेमाल कुछ सहयोगी संस्थाओं की बाध्यताएं को पूरा करने के लिए किया. SEBI ने आरोप लगाया कि इसके बाद जुड़ी हुई संस्थाएं के जरिए ट्रांसजेक्शन की ऐसी श्रृंखला बनाई गई जिससे ZEEL को रकम मिलने का रिकॉर्ड दिखाई दिया, जबकि रेगुलेटर ने इन्हें फर्जी पुस्तक प्रविष्टियां बताया. जून 2023 में SEBI ने चंद्रा और उनके बेटे पुनीत गोयनका को लिस्टेड कंपनियों में डायरेक्टर/केएमपी पद संभालने से रोकने का अंतरिम ऑर्डर दिया. अगस्त 2023 में पुष्टिकरण आदेश के माध्यम से प्रतिबंधों को अधिकृत किया गया. चंद्रा ने इस आदेश को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल में चुनौती दी. 2025 के SAT ऑर्डर में इस विवाद का उल्लेख करते हुए कहा गया कि SEBI की जांच लेटर ऑफ कम्फर्ट और उससे जुड़े लेनदेन को लेकर थी. 2026 में SEBI की बड़ी कार्रवाई इस विवाद में जुलाई 2026 में एक महत्वपूर्ण संसोधन आया. SEBI ने जी एंटरटेनमेंट, सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका के खिलाफ सिक्योरिटीज कानून उल्लंघन पर अंतिम कार्रवाई की. SEBI ने चंद्रा पर 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और उन्हें सिक्योरिटी मार्केट से एक साल के लिए प्रतिबंधित किया. पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपये और ZEEL पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. कंपनी को भी दो महीने के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया गया. कार्रवाई का संबंध ZEEL की हैदराबाद स्थित जमीन को प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं के ऋणों को सुरक्षा के रूप में उपयोग किया जाता था. SEBI की कार्रवाई में मुख्य सवाल यह था कि कंपनी की संपत्ति को इस तरह इस्तेमाल करने से पहले जरूरी कॉर्पोरेट अप्रूवल और डिस्क्लोजर किए गए थे या नहीं. शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी का मामला सुभाष चंद्रा से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विनियामक मामला शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी Ltd का है. अप्रैल 2023 में SEBI ने कंपनी, उसके प्रमोटर जयनीर इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अंतरिम आदेश-सह-कारण बताओ नोटिस जारी किया. SEBI की जांच में आरोप सामने आया कि कंपनी के फंड्स को कनेक्टेड एंटिटीज के थ्रूज प्रमोटर फैमिली से जुड़ी एंटिटीज की ओर डायवर्ट किया गया. रेगुलेटर ने कहा कि कंपनी के लगभग 100 परसेंट डेटर्स कनेक्टेड एंटिटीज से जुड़े पाए गए और ट्रांजैक्शन्स में लेयर्ड स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल दिखाई दिया. Yes बैंक और 200 करोड़ रुपये की FD का विवाद सुभाष चंद्रा से जुड़ा एक अलग कानूनी विवाद Yes बैंक के साथ भी रहा. Yes बैंक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में ZEEL, सुभाष चंद्रा, पुनीत गोयनका और अन्य के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. विवाद 31 मई 2016 के लेटर ऑफ कम्फर्ट से जुड़ा था. Yes बैंक का कहना था कि यह लेटर असल में ग्रारंटी की तरह काम करता है और उधारकर्ता के डिफ़ॉल्ट की स्थिति में ZEEL को रकम चुकानी चाहिए. अगस्त 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम चरण पर यस बैंक की एप्लीकेशन खारिज करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि लेटर ऑफ कम्फर्ट को गारंटी नहीं माना जा सकता. मामला पूरी तरह समाप्त होने के बजाय आगे न्यायनिर्णय के लिए निर्णायक रहा. बाद में 2018 के दूसरे लेटर ऑफ कम्फर्ट और 200 करोड़ रुपये की ZEEL FD को लेकर SEBI की अलग कार्यवाही भी सामने आईं. 2019 में Essel Group का भारी कर्ज संकट 2019 में Essel Group की फाइनेंशियल स्थिति को लेकर बड़ा संकट सामने आया था. ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों ज़ी एंटरटेनमेंट और डिश टीवी के प्रमोटर्स के शेयर लेंडर्स के पास प्लेज्ड थे. शेयर स्टैंडिंग में तेज गिरावट के बाद लेंडर्स के डिफॉल्ट डिक्लेयर करने की धमकी बढ़ गई थी. जनवरी 2019 में Essel Group ने लेंडर्स के साथ एग्रिमेंट की घोषणा की और कहा कि केवल शेयर प्राइस मूवमेंट के कारण डिफ़ॉल्ट इवेंट डिक्लेयर नहीं किया जाएगा. ग्रुप ने स्ट्रेटेजिक एसेट सेल के ज़रिए डेट रेज़ोल्यूशन की बात कही थी. यह अपने आप में सुभाष चंद्रा के ख़िलाफ़ क्रिमिनल केस नहीं था, लेकिन आगे चलकर उनकी पर्सनल गारंटी और एस्सेल ग्रुप-लिंक्ड बॉरोइंग से जुड़े इन्सॉल्वेंसी डिस्प्यूट्स की नींव बना. 2024 में SEBI समन को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला 2024 में SEBI की धन-विचलन जांच के दौरान चंद्रा को रेगुलेटर की ओर से समन जारी किए गए. चंद्रा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर SEBI की कार्रवाई को चुनौती दी. 26 जून 2024 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें SEBI के 27 मार्च के समन का जवाब देने और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा. यह प्रक्रिया इस बात को लेकर थीं कि जांच में SEBI को जरूरी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे थे या नहीं. SEBI ने उस समय SAT में यह भी कहा था कि चंद्रा जांच में Cooperate नहीं कर रहे थे, जबकि चंद्रा की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया था.
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