politics
स्कूलों में फोटो-वीडियो पर रोक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा:प्रिया मिश्रा ने दाखिल की याचिका, कहा- बदहाली दिखाने पर रोक नहीं लग सकती
अयोध्या के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियो बनाने पर रोक का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस रोक को लेकर प्रिया मिश्रा ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में उत्तर प्रदेश और राजस्थान में जारी ऐसे आदेशों को चुनौती दी गई है। प्रिया मिश्रा का कहना है कि इससे सरकारी स्कूलों की कमियां और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सामने लाना मुश्किल होगा। मंगलवार को याचिका सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश की गई। याचिका में इन प्रतिबंधों को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए आदेशों में बदलाव की मांग की गई है। प्रिया मिश्रा ने दाखिल की जनहित याचिका अयोध्या जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने 19 अगस्त को आदेश जारी किया था। इसमें बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना सरकारी स्कूलों में जाने से रोक दिया गया है। बिना अनुमति स्कूल में फोटो और वीडियो बनाने पर भी रोक लगाई गई है। प्रिया मिश्रा ने अपनी याचिका में इस आदेश को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं। राजस्थान में भी फोटो-वीडियो के लिए अनुमति जरूरी याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 16 अगस्त को जारी सर्कुलर का भी जिक्र है। इसमें बाहरी लोगों को सरकारी स्कूल में प्रवेश से पहले प्रधानाचार्य से अनुमति लेने की बात कही गई है। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग के लिए भी लिखित अनुमति जरूरी की गई है। प्रिया मिश्रा का कहना है कि ऐसे नियमों से सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने लाने में परेशानी होगी। बच्चों की सुरक्षा के नाम पर पूरी रोक पर सवाल याचिका में सरकारी स्कूलों की कमियों को सामने लाने के लिए कॉकरोच जनत पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बच्चों की पहचान या निजी जानकारी रिकॉर्ड करना और स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को रिकॉर्ड करना अलग-अलग बातें हैं। याचिका के मुताबिक बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी नियम बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसके नाम पर स्कूल की इमारत, कक्षाओं, शौचालय, पेयजल, बिजली और मिड-डे मील जैसी सुविधाओं की स्थिति दर्ज करने पर पूरी तरह रोक नहीं लगनी चाहिए। एफआईआर और पॉक्सो की कार्रवाई की आशंका याचिकाकर्ता की ओर से वकील नरेंद्र मिश्रा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन आदेशों के कारण सरकारी स्कूलों की कमियां दिखाने वाली तस्वीरें या वीडियो बनाने वालों के खिलाफ एफआईआर हो सकती है। उन्होंने पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की आशंका भी जताई। वकील ने बताया कि याचिका पहले ही दाखिल की जा चुकी है और जल्द सुनवाई की मांग की गई है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा- हम देखेंगे। मौलिक अधिकारों का दिया हवाला प्रिया मिश्रा ने याचिका में कहा है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान के आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A में दिए गए मौलिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं। याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी जरूरी जानकारी लोगों तक पहुंचाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। साथ ही बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। आदेशों में बदलाव की मांग प्रिया मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट से दोनों राज्यों के आदेशों को उस हिस्से तक रद्द करने की मांग की है, जहां बाहरी लोगों के प्रवेश और स्कूलों की स्थिति की फोटो-वीडियोग्राफी पर व्यापक रोक लगाई गई है। साथ ही मांग की गई है कि सार्वजनिक हित में स्कूलों की स्थिति रिकॉर्ड करने के लिए बनाए जाने वाले नियम जरूरत के हिसाब से हों और उन पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उचित सीमाएं तय की जाएं। --------------- यह खबर भी पढ़िए यूपी में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी:योगी का बड़ा ऐलान, लखनऊ में कहा- आयोग हर भर्ती 6 महीने में फाइनल करे यूपी में 6 महीने के अंदर 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी। सीएम योगी ने मंगलवार को लखनऊ में इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा- अगले 6 महीने में 1 लाख नौजवानों को जॉइनिंग लेटर बांटूंगा। पिछले 9 साल में 9.30 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। उनकी ऊर्जा और प्रतिभा का फायदा यूपी की अर्थव्यवस्था को मिला है। पढ़ें पूरी खबर...
Read full article on Bhaskar