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शिक्षिका से छेड़छाड़ के आरोपी को 5 साल की सजा:खंडवा में स्कूल में घुसकर हाथ पकड़ा; कोर्ट बोला- दोषी पर नरमी नहीं दिखा सकते
खंडवा स्कूल परिसर में घुसकर महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ करने, हाथ पकड़ने, शासकीय रिकॉर्ड फाड़ने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में कोर्ट ने आरोपी गोलू निहाल को 5 साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुष्पक पाठक ने आरोपी पर 2 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर एक माह की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि प्राथमिक शाला भवन विद्या का मंदिर है। यहां बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। ऐसे स्थान पर महिला शिक्षिका के साथ इस तरह का कृत्य गंभीर अपराध है। दोषी किसी तरह की नरमी का पात्र नहीं है। मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक रविंद्र पवार ने पैरवी की। एक महीने से शिक्षिका का पीछा कर रहा था अभियोजन के अनुसार, पीड़ित महिला शिक्षिका ग्राम चिखलीखेड़ा की प्राथमिक शाला में पदस्थ हैं। वह रोज खिरकिया से स्कूल आना-जाना करती थीं। आरोपी गोलू निहाल करीब एक महीने से उनका पीछा कर परेशान कर रहा था। 22 अगस्त 2024 को शिक्षिका ने आरोपी को स्कूल के पास समझाया था। उन्होंने पीछा नहीं करने और परेशान न करने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद आरोपी नहीं माना। स्कूल में घुसकर पकड़ा हाथ 23 अगस्त 2024 की सुबह करीब 10 बजे शिक्षिका स्कूल पहुंचीं। इसी दौरान आरोपी स्कूल परिसर में घुस आया। आरोप है कि उसने बुरी नीयत से शिक्षिका का हाथ पकड़ लिया और उनके साथ अभद्रता की। शिक्षिका ने विरोध करते हुए शोर मचाया तो आरोपी स्कूल के कमरे में चला गया। इसके बाद आरोपी ने वहां रखा सरकारी दाखिल-खारिज रजिस्टर फाड़ दिया। जाते समय उसने शिक्षिका को धमकी दी कि अगर उन्होंने घटना के बारे में किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की तो वह उन्हें गांव में नौकरी नहीं करने देगा। आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी। परिचित के साथ थाने पहुंचीं शिक्षिका घटना के बाद शिक्षिका डर गईं। उन्होंने अपने परिचित के साथ थाना किल्लौद पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से फटा हुआ शासकीय रजिस्टर जब्त किया और पंचनामा बनाया। जांच पूरी होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया गया। कोर्ट ने कहा- ऐसे दोषी पर नरमी नहीं दिखा सकते सुनवाई के दौरान अभियोजन ने शिक्षिका के बयान सहित अन्य साक्ष्य कोर्ट में पेश किए। अभियोजन ने आरोपी के कृत्य को गंभीर बताते हुए उचित सजा की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी की कम उम्र, आर्थिक स्थिति और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देकर सजा में नरमी की मांग की। कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा ऐसे दोषी पर नरमी नहीं दिखा सकते। अदालत ने कहा कि सजा का उद्देश्य केवल दोषी को सुधारना नहीं है। गंभीर अपराधों में समाज के सामने उदाहरण पेश करना भी इसका एक उद्देश्य है।
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