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स्वरूपानंद महाविद्यालय में हिंदी सप्ताह: कला संकाय के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की लोकभाषा और लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत
‘मेरी भाषा, मेरी विरासत’ के अंतर्गत हिंदी सप्ताह में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया लोकज्ञान और पारंपरिक कौशल का अनूठा संग्रह भिलाई . असल बात news. भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की स्मृति, संस्कृति और पहचान होती है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई में हिंदी विभाग एवं कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में “मेरी भाषा, मेरी विरासत” विषय पर आधारित हिंदी सप्ताह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, लोकज्ञान और लोकपरंपराओं को विद्यार्थियों से जोड़ना तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति उनमें जागरूकता उत्पन्न करना रहा। हिंदी सप्ताह के अंतर्गत “लोकभाषा एवं हिंदी अभिव्यक्ति प्रतियोगिता” तथा “स्वदेशी ज्ञान एवं पारंपरिक कौशल प्रदर्शनी” का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और रचनात्मकता के साथ सहभागिता की। डॉ. सुनीता वर्मा, विभागाध्यक्ष, हिंदी एवं कला संकाय ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकभाषा, लोकज्ञान और लोकपरंपराएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर हैं। विद्यार्थियों के माध्यम से इन परंपराओं का संकलन, प्रस्तुतीकरण और दस्तावेजीकरण नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषा के प्रति प्रेम के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। श्री शंकराचार्य शैक्षणिक परिसर के निदेशक डॉ. दीपक शर्मा एवं डॉ. मोनिषा शर्मा ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में सृजनात्मकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करती हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. (श्रीमती) हंसा शुक्ला ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा, लोकज्ञान एवं पारंपरिक कौशल के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि हमारी लोकपरंपराएँ हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है। कार्यक्रम की निर्णायक डॉ. श्रद्धा मिश्रा, सहायक प्राध्यापक, हिंदी, शंकराचार्य महाविद्यालय, जूनवानी एवं डॉ. मीना मिश्रा रहीं। निर्णायकों ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न रचनात्मक कार्यों का अवलोकन किया तथा उनकी अभिव्यक्ति, प्रस्तुतीकरण और लोकज्ञान के प्रति रुचि की सराहना की। डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने अपने उद्बोधन में लोकभाषा और लोकपरंपराओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को लोकभाषा एवं लोकज्ञान के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंतर्गत “मोबाइल के दौर में लोकपरंपराओं का संरक्षण” विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने बदलती जीवनशैली और आधुनिक तकनीक के दौर में अपनी लोकपरंपराओं, लोकभाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसी क्रम में लोकज्ञान संग्रह अभियान “मेरी भाषा, मेरी बोली – मेरी पहचान” के अंतर्गत विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ के समृद्ध लोकजीवन से जुड़े लोकगीत, लोकनृत्य, लोककथाएँ, लोकपर्व एवं परंपराएँ, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, कहावतें तथा पहेलियों को विषय बनाकर आकर्षक चार्ट, मॉडल एवं पोस्टर तैयार किए। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से इन विषयों से संबंधित जानकारी साझा की और यह दर्शाया कि हमारे लोकजीवन में संचित ज्ञान केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि आज भी हमारी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का जीवंत हिस्सा है। इस गतिविधि में विद्यार्थियों ने एकल एवं समूह दोनों रूपों में सहभागिता की। कार्यक्रम में “संदेश-पट्टिका (प्लेकार्ड) प्रतियोगिता” के अंतर्गत “एक छत्तीसगढ़ी शब्द – उसका अर्थ” विषय भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने पारंपरिक एवं प्रचलित छत्तीसगढ़ी शब्दों का चयन कर उनके अर्थ और प्रयोग को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी स्थानीय बोली की मिठास, शब्द-संपदा और लोकजीवन से उसके गहरे संबंध को समझने का अवसर मिला। इस प्रकार पूरे आयोजन में निबंध, चार्ट, मॉडल, पोस्टर और प्लेकार्ड के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी भाषा, बोली, लोकज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं के विविध रंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। विजयी प्रतिभागियों के नाम इस प्रकार है निबंध प्रतियोगिता के विजेता: निबंध प्रतियोगिता के विजेता 1. डिम्पल साहू — प्रथम — बी.एससी. प्रथम सेमेस्टर 2. पूजा — द्वितीय — एम.एससी. तृतीय सेमेस्टर 3. अपेक्षा राजपूत — तृतीय — बी.ए. तृतीय सेमेस्टर प्लाकार्ड प्रतियोगिता के विजेता 1. डिम्पल साहू — प्रथम — बी.एससी. प्रथम सेमेस्टर 2. जिज्ञासा साहू — द्वितीय — डी.एल.एड. द्वितीय वर्ष 3. पूजा — तृतीय — एम.एससी. तृतीय सेमेस्टर चार्ट/पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता 1. डिम्पल साहू — प्रथम — बी.एससी. प्रथम सेमेस्टर 2. अपेक्षा राजपूत — द्वितीय — बी.ए. तृतीय सेमेस्टर 3. भावना साहू — तृतीय — बी.एससी. तृतीय सेमेस्टर कार्यक्रम का मंच संचालन कला संकाय की सहायक प्राध्यापक ज्योति मिश्रा ने किया, जबकि कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहायक प्राध्यापक गोल्डी सिंह राजपूत व सहायक प्राध्यापक अंग्रेजी गायत्री साहू का विशेष सहयोग रहा। हिंदी सप्ताह का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अपनी भाषा, अपनी बोली, अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों को पहचानने का एक सार्थक अवसर बना। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ के लोकजीवन के विविध रंग दिखाई दिए और पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि अपनी विरासत को जानना, समझना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना ही उसके संरक्षण की पहली और महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
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