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सौतेला पिता ही बना नाबालिग का गुनहगार:कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा; टिप्पणी- ऐसे आरोपी से सहानुभूति नहीं
इंदौर में 16 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ दुष्कृत्य करने वाले उसके सौतेले पिता को स्पेशल कोर्ट ने 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 और 3/4 के तहत यह सजा दी। इसके अलावा भादंवि की धारा 342 के तहत 3 माह का सादा कारावास और कुल 21 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला 17 अगस्त को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय ने सुनाया। सौतेला पिता होने के बावजूद किया अपराध, कोर्ट ने कहा- सहानुभूति की गुंजाइश नहीं कोर्ट ने अपने फैसले में आरोपी के सौतेला पिता होने को गंभीर परिस्थिति माना। कोर्ट ने कहा कि बालकों के प्रति बढ़ते अपराध, उनकी असुरक्षा और ऐसे अपराधों का उनके वर्तमान एवं भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए आरोपी को शिक्षाप्रद दंड देना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सौतेला पिता होते हुए ऐसा अपराध करने वाले आरोपी के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती। मां नौकरी पर गई थी, घर में बच्चों के साथ था आरोपी अभियोजन के मुताबिक 25 मई 2024 को बालिका अपनी मां के साथ थाने पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बालिका ने बताया था कि घटना के समय उसकी मां नौकरी पर गई थी और वह अपने भाई-बहनों के साथ घर पर थी। इसी दौरान उसका सौतेला पिता घर आया। उसने बेडरूम के दोनों दरवाजे बंद कर दिए और मोबाइल पर तेज आवाज में गाने चला दिए। इसके बाद उसने बालिका के साथ गलत काम किया। रोते हुए बाथरूम गई, नहाकर पड़ोस की महिला के घर पहुंची बालिका ने पुलिस को बताया कि वह घटना के बाद जोर-जोर से रोने लगी और आरोपी से खुद को छुड़ाकर बाथरूम चली गई। वह इतनी डर गई थी कि उसे खुद से घिन महसूस हो रही थी। उसने तुरंत स्नान किया और इसके बाद पड़ोस की महिला के घर पहुंची। बालिका ने महिला से अपनी मां से बात कराने के लिए कहा। मां ने फोन नहीं उठाया तो महिला ने उसके रोने का कारण पूछा। इस पर बालिका ने पूरी घटना बताई। बाद में मां का फोन आने पर पड़ोस की महिला ने उन्हें भी घटना की जानकारी दी। पहले भी करता था छेड़खानी, मां को छोड़कर जाने की धमकी देता था अभियोजन के अनुसार, बालिका ने अपने बयान में बताया था कि आरोपी पहले भी उसके साथ छेड़खानी कर चुका था। वह उसकी मां को छोड़कर चले जाने की धमकी देता था। बालिका को डर था कि ऐसा होने पर उसकी मां की हालत खराब हो जाएगी। उसने बताया कि उसका और उसके भाई-बहनों का मां के अलावा कोई नहीं है। इसी वजह से उसने पहले मां को यह नहीं बताया था कि सौतेला पिता उस पर गलत नजर रखता है। 10 गवाहों की गवाही से अभियोजन ने मामला साबित किया रिपोर्ट के आधार परपुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 342, 354, 354-क, 376(2)(के), 376(2)(एफ) और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। जांच के दौरान बालिका के बयान दर्ज किए गए, मेडिकल परीक्षण कराया गया और अन्य गवाहों के बयान लिए गए। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने विवेचना पूरी कर कोर्ट में चालान पेश किया। अभियोजन ने कोर्ट में 10 गवाहों के बयान कराए। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और अन्य दंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से पैरवी सीमा शर्मा (विशेष लोक अभियोजक) ने की। पीड़िता को 4 लाख रुपए देने की अनुशंसा फैसले में कोर्ट ने पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत बालिका को हुई मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने की अनुशंसा भी की है। कोर्ट ने माना कि इस तरह के अपराध का बालिका के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी को देखते हुए दोषी को कठोर दंड देना आवश्यक है।
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