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सरेंडर अर्जी को गुनाह कबूलनामा मान सुना दी सजा:दंपत्ति को दोषी ठहरा 6 माह कैद का आदेश दिया था, हाईकोर्ट ने किया रद
मारपीट में सरेंडर अर्जी को गुनाह कबूलनामा मानकर सजा सुनाने के मामले में हाईकोर्ट ने दोबारा ट्रायल का आदेश दिया है। कोर्ट ने मारपीट में पति और पत्नी को 6 माह सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ सेशन कोर्ट से अपील भी खारिज हो गई थी। 17 जुलाई 1998 में कल्याणपुर में दर्ज हुई थी FIR मसवानपुर निवासी संतोष शर्मा ने कल्याणपुर थाने में 17 जुलाई 1998 में अपने चाचा कन्हैया और चाची उर्मिला के खिलाफ घर मे घुसकर मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुए। इसके बाद उन्होंने अदालत में सरेंडर अर्जी दी। कोर्ट ने इस आवेदन को ही गुनाह कबूल मान लिया। इसी आधार पर 28 नवंबर 2025 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए छह माह कैद की सजा सुना दी थी। इसके खिलाफ दोषियों ने सेशन कोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की। सेशन कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। अधिवक्ता अनंत शर्मा ने बताया कि सेशन कोर्ट ने माना था, कि अगर दोषसिद्धि आरोपियों के दोष स्वीकार के आधार पर हुई है तो धारा 375 सीआरपीसी के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ अपील सीमित होती है। 12 मार्च को आदेश को निरस्त किया गया मुख्य रूप से सजा की अविध को ही चुनौती दी जा सकती है। इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण दाखिल की। कहा कि उन्होंने कभी अपराध स्वीकार नहीं किया था, उन्होंने केवल सरेंडर अर्जी दी थी। हाईकोर्ट ने 28 नवंबर 2025 के दोषसिद्धि आदेश और 12 मार्च 2026 के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही मामला ट्रायल कोर्ट को वापस भेजते हुए कानून के अनुसार नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया है।
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