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राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाला,बिस्तर ओढ़कर सोए रोत:उदयपुर सांसद ने कहा- विदेशी फंडिंग के सहारे आदिवासियों को भटकाने की साजिश

📰 Bhaskar 🕐 1 min read 📅 August 15, 2026 👁 4 views
राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाला,बिस्तर ओढ़कर सोए रोत:उदयपुर सांसद ने कहा- विदेशी फंडिंग के सहारे आदिवासियों को भटकाने की साजिश
उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) और बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत पर तीखा सियासी हमला बोला है। रावत ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रोत ने मतदान नहीं किया और 'बिस्तर ओढ़कर सोए थे'। उन्होंने यह भी दावा किया कि विदेशी फंडिंग के सहारे आदिवासियों को भटकाने की साजिश की जा रही है। सांसद रावत ने कहा कि आदिवासी अधिकारों के नाम पर केवल राजनीति हो रही है और बाप नेताओं का असली चेहरा समाज के सामने है। रोत का गैर जिम्मेदाराना रुख आदिवासियों का अपमान उन्होंने कहा कि जब देश में आदिवासी समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने का ऐतिहासिक मौका था, तब तत्कालीन विधायक राजकुमार रोत ने वोट तक नहीं डाला। वे चौरासी में गुदड़ी (बिस्तर) ओढ़कर सोए रहे। समाज के सर्वोच्च सम्मान के समय ऐसा गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाना सीधे तौर पर आदिवासियों का अपमान है। लोग इसका विरोध करते हैं, वे अगर 79 हजार करोड़ की रकम के पीछे लगने वाली बिंदियां (शून्य) गिनने या लिखने बैठेंगे, तो उन्हें सुबह से शाम हो जाएगी लेकिन इसका गणित समझ नहीं आएगा। विदेशी फंडिंग और खास सोच के सहारे आदिवासियों को भटकाया सांसद रावत ने राजकुमार रोत की संयुक्त राष्ट्र (यूएन) यात्रा और उनके संबोधन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि डूंगरपुर में मीडिया के सामने रोत ने निजी खर्चे पर यात्रा का दावा किया था, लेकिन इसमें तय प्रोटोकॉल और नियमों की अनदेखी हुई। उन्होंने कहा कि रांची स्थित विक्टर और भारतीय आदिवासी संगम जैसे संगठनों ने उन्हें वहां भेजा। विक्टर धर्मांतरित हैं। रावत ने आरोप लगाया कि विदेशी फंडिंग और खास सोच के सहारे भोले-भाले आदिवासियों को मुख्यधारा और संविधान से भटकाने का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। 2007 में यूएन में भारत का पक्ष पूरी मजबूती से रखा उदयपुर सांसद रावत ने याद दिलाया कि साल 2007 में तत्कालीन सरकार के प्रतिनिधि अजय मल्होत्रा ने यूएन में भारत का पक्ष पूरी मजबूती से रखा था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि भारत में रहने वाले सभी नागरिक 'इंडिजिनस' (मूल निवासी) हैं और देश में इसकी कोई अलग परिभाषा नहीं है। इंडिया गेट पर ढपली बजाना, नक्सलवाद को समर्थन देना संविधान विरोधी सांसद ने कहा कि इंडिया गेट पर ढपली बजाना, नक्सलवाद को समर्थन देना और हर घर से हिड़मा निकालने की बातें करना पूरी तरह विकास, समाज और संविधान विरोधी है। संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने भी सही कहा था कि संविधान की वजह से ही वे आज सदन में बैठे हैं, वरना सरेंडर करने वालों की कतार में होते। भाजपा सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के समय अलग जनजाति मंत्रालय और आयोग बनाया। वहीं मोदी सरकार ने धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान और पीएम जनमन योजना के जरिए 63 हजार गांवों के विकास का ऐतिहासिक काम शुरू किया है। 79 हजार करोड़ के बजट में जीरो गिनते-गिनते शाम हो जाएगी सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने देश के 63 हजार गांवों के समग्र विकास के लिए 'धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान' में 79 हजार करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट तय किया है। उन्होंने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग इसका विरोध करते हैं, वे अगर 79 हजार करोड़ की रकम के पीछे लगने वाली बिंदियां (शून्य) गिनने या लिखने बैठेंगे, तो उन्हें सुबह से शाम हो जाएगी लेकिन इसका गणित समझ नहीं आएगा।
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