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प्रयागराज PWD में 69.73 लाख के आउटसोर्स भुगतान में गड़बड़ी:33.32 लाख बिना बिल पास, ऑडिट में डबल पेमेंट भी पकड़ा गया
प्रयागराज में लोक निर्माण विभाग (PWD) के विद्युत यांत्रिक खंड में आउटसोर्सिंग सेवाओं के नाम पर किए गए 69.73 लाख रुपए के भुगतान में 33.32 लाख रुपए बिना बिल के पास करने का मामला सामने आया है। महालेखाकार (AG) कार्यालय के ऑडिट में यह वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है। ऑडिट में सामने आया कि जूनियर इंजीनियर (JE) से लेकर सहायक अभियंता (AE), अधिशासी अभियंता (XEN), अधीक्षण अभियंता (SE) और जिला कोषागार तक फाइल पहुंची, लेकिन किसी स्तर पर बिना बिल के भुगतान पर आपत्ति नहीं की गई। ऑडिट के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई है। ऑडिट में एक ही भुगतान के समर्थन में दोबारा इस्तेमाल किए गए बिल, जरूरी अभिलेख नहीं मिलने और बिल से ज्यादा रकम पास किए जाने की गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। वहीं, विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या और उनके भुगतान को लेकर पहले भी शिकायत की जा चुकी थी, लेकिन उस समय जांच नहीं हुई। 69.73 लाख के भुगतान में 33.32 लाख बिना बिल के विद्युत यांत्रिक खंड की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट, लोक सेवा आयोग, सर्किट हाउस और PWD गेस्ट हाउस में आउटसोर्सिंग के जरिए इलेक्ट्रीशियन, हेल्पर और लिफ्ट ऑपरेटर समेत 50 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती की गई है। पिछले तीन साल से प्रयागराज की लीलावती इंटरप्राइजेज यह सेवा दे रही है। फर्म को 14 जुलाई को 34,75,923 रुपए और 25 जुलाई को 34,98,897 रुपए का भुगतान किया गया। इन दोनों भुगतानों की ऑडिट जांच में कुल 33,32,933 रुपए बिना बिल के भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। 34.75 लाख के भुगतान में 16.45 लाख का बिल नहीं मिला ऑडिट में सबसे बड़ी आपत्ति 16,45,017 रुपए के भुगतान को लेकर है। एक वाउचर में 34,75,026 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि उससे जुड़े 111 बिलों के आधार पर स्वीकृत राशि 18,30,009 रुपए ही बनती थी। इस तरह 16,45,017 रुपए का भुगतान बिना बिल के किया गया। इसी तरह 34,98,897 रुपए के दूसरे भुगतान के समर्थन में 26,32,686 रुपए के ही बिल मिले। इसमें करीब 8.66 लाख रुपए बिना बिल के भुगतान किए जाने की बात ऑडिट में सामने आई। 1.62 लाख का भुगतान भी बिना बिल के मिला ऑडिट रिपोर्ट के दूसरे बिंदु में 1,62,326 रुपए के बिना बिल भुगतान पर आपत्ति दर्ज की गई है। वहीं 4,59,379 रुपए के एक अन्य भुगतान के समर्थन में मूल बिल, वाउचर और जरूरी अभिलेख नहीं मिले। ऑडिट में कुछ बिलों के दोबारा इस्तेमाल का मामला भी सामने आया है। कुछ बिल पहले एक वाउचर के साथ लगाए गए और बाद में दूसरे वाउचर में भी दिखे। इससे एक ही बिल के आधार पर दोबारा भुगतान किए जाने की संभावना जताई गई है। JE से कोषागार तक कई स्तरों से गुजरती है फाइल विभागीय व्यवस्था के मुताबिक ठेकेदार की ओर से लगाए गए बिल और कर्मचारियों के दावों का सबसे पहले संबंधित JE सत्यापन करता है। इसके बाद फाइल AE, XEN और SE स्तर से स्वीकृत होती है। विभागीय स्वीकृति के बाद भुगतान के लिए फाइल जिला कोषागार भेजी जाती है। इतने स्तरों से गुजरने के बावजूद बिना बिल के भुगतान होने पर ऑडिट में सवाल उठाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए SE नरेश कुमार ने विभागीय जांच शुरू कराई है। पहले भी शिकायत, कर्मचारियों की संख्या और बिल पर उठे थे सवाल प्रयागराज के कटरा निवासी ठेकेदार देवेश रंजन ने पहले भी आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान में अनियमितता की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि कई जगह कर्मचारियों की संख्या कम होने के बावजूद ज्यादा कर्मचारियों का भुगतान लिया जा रहा है। उन्होंने फर्जी बिलों के जरिए भुगतान किए जाने का आरोप भी लगाया था। शिकायत के समय विभाग की ओर से जांच नहीं कराई गई थी। अब AG कार्यालय के ऑडिट में अनियमितताएं सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई है।
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